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Date: 
07.02.2017
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उत्तराखण्ड में उम्मीद्वारी का पहला मतलब अपराधी होना और दूसरा करोड़पति होना, देवभूमि की त्रासदी...

उत्तराखण्ड चुनाव में अपराधी और करोड़पतियों की भरमार...

नई दिल्ली: राजनीति और अपराधीकरण एक दूसरे का पर्याय माने जाने लगे हैं क्योंकि भले ही पीएम से लेकर राष्ट्रपति ने इस बात को कई बार कहा हो कि राजनीति में अपराधिकरण ख़त्म होना चाहिए लेकिन ऐसा होना संभव भी है क्या? क्योंकि तमाम दावों के बाद भी ज़मीनी हकीक़त कुछ और ही है. इस चुनाव में भी आपराधिक मुकदमें झेल रहे कई प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं तो करोड़पतियों का भी इस चुनावी दंगल में बोलबाला है. उत्तराखण्ड चुनाव में आपराधिक मामलों वाले प्रत्याशियों की संख्या 2012 के मुक़ाबले तक़रीबन दोगुनी हो गई है.

कौन हैं उत्तराखंड के वह दस नेता जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में सबसे अमीर प्रत्याशी? चलिए हम आपको बताते हैं. देवभूमि के चुनावी दंगल में 2012 में हुये चुनाव के मुकाबले इस बार ये संख्या दो गुना से ज्यादा बढ़ गयी है. मौजूदा चुनाव में 54 उम्मीदवार ऐसे में जिनपर आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं. 2012 में ये आंकड़ा 28 था. ADR के ताज़ा आंकड़े इस बात को पुख़्ता कर रहे हैं.

प्रत्याशी--पार्टी--दर्ज मामले

अरविंद पाण्डेय--भाजपा--12

सुभाष चौधरी--बसपा--08

सुमित--निर्दलीय--06

किशन भंडारी--निर्दलीय--04

समीर रतूड़ी--प्रजामंडल--04

रामसुख--निर्दलीय--04

सुधा पटवाल--निर्दलीय--03

दिनेशअग्रवाल--कांग्रेस--02

सूर्यकांत धस्माना--कांग्रेस--02

हरक सिंह रावत--भाजपा--02

अमीर उम्मीदवार

उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में करोड़पति उम्मीदवारों की संख्या भी अधिक है. 637 उम्मीदवारों में से दो सौ उम्मीदवार करोड़पति हैं. 78 उम्मीदवारो ने आयकर रिटर्न भी फाइल नहीं किया है.करोड़पति उम्मीदवारों में 18 महिला प्रत्याशियों ने भी करोड़ों की सम्पत्ति का ब्यौरा दिया है. उत्तराखंड की पांच सबसे अमीर महिला प्रत्याशियों में कांग्रेस छोड़ भाजपा में गईं रेखा आर्य का नाम टॉप पर है.

प्रत्याशी--पार्टी--सम्पत्ति

रेखा आर्य--भाजपा--12.70 करोड़ रू.

लक्ष्मी राणा--कांग्रेस--6.48 करोड़

गोदावरी थापली--कांग्रेस--5.87 करोड़

बृजरानी निर्दलीय--5.51 करोड़

मनीषा--सपा--4.80 करोड़

संसदीय राजनीति में राजनीति का धर्म हो या धर्म की राजनीति पर लगता तो यही है कि मौजूदा वक़्त में राजनीति में होने की पहली ज़रूरत अपराधी और पैसे वाला होना ही है. शायद इसलिए गंभीर आपराधिक मुकदमे वाले प्रत्याशियों की भरमार इस चुनाव में साफ तौर पर देखी जा सकती है. 2012 के चुनाव में 5 ऐसे प्रत्याशी चुनाव जीते थे जिनपर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे. मौजूदा विधानसभा चुनाव में भी कई दागी मैदान में हैं.लगभग सभी राजनीतिक दलों में इनकी पैठ है. बहरहाल धनबल और आपराधिक मुकदमे वाले नेताओं की किस्मत का फ़ैसला जनता के हाथ में है. तो आने वाले वक़्त में जनता का प्रतिनिधि हो कैसा यह जनता को ही तया करना है...

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