Source: 
Satyagrah
Author: 
Date: 
08.03.2022
City: 

राजनीतिक रूप से देश के सबसे अहम सूबे उत्तर प्रदेश में पिछले दो महीने से जारी चुनावी प्रचार का शोर थम गया है. अब चुनावी नतीजों को लेकर राजनीतिक पार्टियों से लेकर पूरे देश के लोगों तक सबकी धड़कनें बढ़ गई हैं. सभी को 11 मार्च, 2017 का इंतजार है, जब उम्मीदवारों की किस्मत के साथ-साथ भारतीय राजनीति की भी दशा और दिशा का एक बड़ा अंदाजा मिलेगा. छह चरणों के चुनाव के बाद सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियां अपनी जीत का दावा कर रही हैं. सबने भरसक कोशिश की है कि आखिरी और सातवें चरण में अधिक से अधिक सीटें जीतकर सत्ता के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर लें.

इस चरण के तहत आज सात जिलों की 40 सीटों पर मतदान होना है. इन सीटों पर कुल 535 उम्मीदवार मैदान में हैं. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और उत्तर प्रदेश इलेक्शन वॉच ने इनमें से 528 उम्मीदवारों द्वारा चुनाव आयोग को सौंपे गए शपथपत्र के आधार पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. रिपोर्ट के मुताबिक इन उम्मीदवारों में कुल 115 यानी 22 फीसदी के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. कुल उम्मीदवारों में से 95 (18 फीसदी) के खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश या अपहरण जैसे गंभीर किस्म के आरोप दर्ज हैं.

सपा अव्वल

बीते हफ्ते छठे चरण के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के आधे उम्मीदवार दागी छवि के थे. इस बार पार्टी के 40 में से 17 (43 फीसदी) उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले चलने की बात स्वीकार की है. हालांकि, इस मामले में इस बार सत्ताधारी समाजवादी पार्टी (सपा) ने सबको मात दे दी है. सपा ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए इस बार 31 सीटों में से 19 पर दागी उम्मीदवारों को मौका दिया है. यानी इस बार सपा के 61 फीसदी उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं. इन दोनों पार्टियों के अलावा भाजपा के 31 में से 13 (42 फीसदी), कांग्रेस के नौ में से पांच (56 फीसदी) और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के 21 में से तीन (14 फीसदी) उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.

गंभीर आपराधिक आरोपों से घिरे उम्मीदवारों में भी सबसे ज्यादा सपा के

सपा गंभीर आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को उतारने में भी अन्य पार्टियों के मुकाबले कहीं आगे है. पार्टी के 15 यानी 48 फीसदी उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं. इसके बाद बसपा के 15 (38 फीसदी), भाजपा के नौ (29 फीसदी), कांग्रेस के पांच (56 फीसदी) और रालोद के तीन (14 फीसदी) उम्मीदवारों ने शपथपत्र में अपने ऊपर गंभीर किस्म के आपराधिक मामले चलने की बात स्वीकार की है.

सातवें चरण के तहत आधे से अधिक विधानसभा सीटों को संवेदनशील घोषित किया गया है. इस बार कुल 40 में से 23 (57.5 फीसदी) सीटों को इस श्रेणी में रखा गया है. संवेदनशील श्रेणी में उन सीटों को रखा जाता है जहां तीन या तीन से अधिक उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इस चरण में जौनपुर की शाहगंज और मरियाहू विधानसभा सीटों पर आपराधिक छवि के सात- सात उम्मीदवार मैदान में हैं.

बसपा ने आखिरी चरण के चुनाव में भी सबसे अधिक करोड़पति उम्मीदवारों को मौका दिया

आखिरी चरण के चुनावी दंगल में उतरे प्रत्याशियों में से 132 (25 फीसदी) उम्मीदवार करोड़पति हैं. 528 में से 46 (नौ फीसदी) उम्मीदवारों के पास पांच करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है. दूसरी ओर, 209 (40 फीसदी) उम्मीदवारों ने अपनी संपत्ति 10 लाख रुपये से कम बताई है. जौनपुर जिले की मरियाहू सीट से बसपा उम्मीदवार भोलानाथ सबसे धनी उम्मीदवार हैं. उन्होंने अपनी संपत्ति 51 करोड़ रुपये से अधिक बताई है. साथ ही, उन्होंने अपने ऊपर सबसे अधिक देनदारी (करीब 15 करोड़ रुपये) होने की बात स्वीकार की है.

दलवार देखें तो पिछले कई चरणों के चुनाव की तरह इस बार भी अन्य पार्टियों की तुलना में बसपा ने सबसे अधिक करोड़पति उम्मीदवारों को मौका दिया है. पार्टी के 40 में से 32 यानी 80 फीसदी उम्मीदवारों के पास एक करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है. इसके बाद भाजपा के 31 में से 23 (74 फीसदी), सपा के 31 में से 21 (68 फीसदी) और कांग्रेस के नौ में से सात (78 फीसदी) उम्मीदवार करोड़पति हैं. एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक कुल 635 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 1.58 करोड़ रुपये है. पिछले चरण में यह आंकड़ा 1.59 करोड़ रुपये था. बसपा उम्मीदवारों की औसत संपत्ति के मामले में अन्य पार्टियों की तुलना में कहीं आगे है. इसके उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 7.20 करोड़ रुपये है. भाजपा में यह आंकड़ा 5.63 करोड़, सपा के लिए 3.74 करोड़ और कांग्रेस में 2.73 करोड़ रुपये है.

इस चरण के चुनाव में भी महिला प्रत्याशियों की संख्या केवल नौ फीसदी ही है

सातवें चरण के चुनावी दंगल में उतरे 229 (43 फीसदी) उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता पांचवीं से 12वीं पास है. साथ ही, 245 (46 फीसदी) उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षणिक योग्यता स्नातक या इससे ज्यादा होने की बात कही है. दूसरी ओर, आठ उम्मीदवारों ने खुद को अनपढ़ बताया है. छठे चरण की तरह इस बार भी कुल उम्मीदवारों में महिला प्रत्याशियों की हिस्सेदारी बहुत कम है. कुल उम्मीदवारों में से महिलाएं सिर्फ नौ फीसदी (47) हैं. इसके अलावा 376 (71 फीसदी) उम्मीदवारों ने अपनी आयु 25 से 50 साल बताई है जबकि, 147 (28 फीसदी) उम्मीदवारों ने अपनी आयु 51 से 80 साल के बीच घोषित की है. दो उम्मीदवारों ने अपनी उम्र शपथपत्र में दर्ज नहीं की है.

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