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Date: 
17.12.2020
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इस साल दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) के दौरान पांच राजनीतिक दलों (Five Parties) को करीब 50 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जबकि मीडिया (Media) में विज्ञापनों पर करीब 22 करोड़ रुपये समेत कुल 34.32 करोड़ रुपये खर्च किए गए. लेकिन अब तक कई दलों ने खर्चे की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने इस बारे में जानकारी दी है.

चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन एडीआर (ADR) ने आज एक बयान जारी कर कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों (Political Parties) ने मीडिया में विज्ञापन देने पर सबसे ज्यादा , 22.72 करोड़ रुपये खर्च किए. प्रचार सामग्री पर 8.05 करोड़ रुपये और जनसभाओं पर 28 लाख रुपये खर्च किए गए.

राजनीतिक दलों ने अब तक नहीं दी खर्च की जानकारी

एडीआर ने कहा कि राजनीतिक दलों ने यात्रा पर कुल खर्च का 51.91 प्रतिशत या 68,000 रुपये स्टार प्रचारकों पर और 63,000 रुपये अन्य नेताओं पर खर्च किए. संगठन ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव हुए 230 से ज्यादा दिन हो चुके हैं, इसके बावजूद बीजेपी,एनसीपी, भाकपा, जेडीयू,आरजेडी, आरएसडी, एसएचएस और एआईएफबी द्वारा किए गए खर्च के बारे में जानकारी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं है.

एडीआर ने कहा कि पांच राजनीतिक दलों-एमकेपी, बीएसपी, आप, एलजेपी और कांग्रेस ने करीब 79 दिनों, 138 दिनों, 138 दिनों, 145 दिनों और 162 दिनों पर खर्च संबंधी विवरण मुहैया कराया. एडीआर ने कहा कि चुनाव लड़ने के बावजूद एलजेपी ने कहा कि पार्टी ने खर्च नहीं किया. खर्च नहीं होने के बावजूद ब्यौरा देने में 145 दिन की देरी पर इसकी जानकारी मुहैया करायी गई.

‘तय समय पर जानकारी न मिलने पर लगे जुर्माना’

एडीआर ने कहा है कि सभी राजनीतिक दलों के लिए तय समय सीमा में निर्वाचन आयोग के पास उचित प्रारूप में खर्च का विवरण मुहैया कराने को जरूरी बनाना चाहिए और समय पर विवरण मुहैया नहीं कराने वाली पार्टियों पर जुर्माना लगाना चाहिए.

दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा के लिए फरवरी में हुए चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 62 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि आठ सीटों पर बीजेपी की जीत हुई थी. चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी.

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