Source: 
Nai Dunia
Author: 
Date: 
24.08.2021
City: 

देश में ऐसे जनप्रतिनिधियों की कमी नहीं है जिनके खिलाफ क्रिमिनल केस चल रहे हैं। यदि इनके मामलों की सुनवाई में इन पर लगाए आरोप कोर्ट में साबित हो जाते हैं एवं इन्‍हें दोषी करार दिया जाता है तो इन पर कार्रवाई हो सकती है। चार केंद्रीय व राज्यों के 35 मंत्रियों ने भी जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा आठ के तहत दर्ज आपराधिक मामलों की घोषणा की है। कानून की धारा आठ की उप धाराएं (1), (2) और (3) में प्रविधान है कि इनमें से किसी भी उप-धारा में उल्लिखित अपराध के लिए दोषी को दोषसिद्धि की तारीख से अयोग्य घोषित किया जाएगा। रिहाई के बाद भी वह आगामी छह साल तक अयोग्य बना रहेगा। एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) ने कहा है कि कुल 363 सांसद व विधायक आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं। अगर दोषसिद्धि हुई तो उन्हें जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत अयोग्य करार दिया जाएगा।

सर्वाधिक सांसद-विधायक भाजपा के

एडीआर ने कहा कि भाजपा में ऐसे सांसदों व विधायकों की संख्या सबसे अधिक 83, कांग्रेस में 47 और तृणमूल कांग्रेस में 25 है। 24 मौजूदा लोकसभा सदस्यों के खिलाफ कुल 43 आपराधिक मामले लंबित हैं, जबकि 111 वर्तमान विधायकों के खिलाफ कुल 315 आपराधिक मामले 10 साल या उससे अधिक समय से लंबित हैं। बिहार में 54 विधायक ऐसे हैं, जो गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। केरल में ऐसे विधायकों की संख्या 42 है।

ऐसे किया गया विश्‍लेषण

चुनाव सुधारों पर काम करने वाले संगठन एडीआर व नेशनल इलेक्शन वाच ने वर्ष 2019-21 तक 542 लोकसभा सदस्यों और 1,953 विधायकों के हलफनामों का विश्लेषण किया है। इसके मुताबिक 2,495 सांसदों व विधायकों में से 363 (15 फीसद) ने घोषणा की है कि उनके खिलाफ अपराधों के लिए अदालतों द्वारा आरोप तय किए जा चुके हैं। इनमें 296 विधायक और 67 सांसद हैं।

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