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Date: 
23.06.2021
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एमपी बिरला ग्रुप से वित्तपोषित परिबर्तन इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 2019-20 में इलेक्टोरल बांड्स के माध्यम से तीन करोड़ चंदा देने की घोषणा की है। यह संभवत: पहली बार है कि कोई ट्रस्ट ने ऐसी घोषणा की है। हालांकि ट्रस्ट ने यह नहीं बताया कि उसने किस राजनीतिक दल को यह चंदा दिया है। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के अनुसार, यह “प्रथा इलेक्टोरल ट्रस्ट्स स्कीम, 2013 और इनकम टैक्स रूल्स, 1962 के नियम 17CA की भावना के खिलाफ है, जो ट्रस्टों के लिए दाता के बारे में प्रत्येक विवरण पेश करने को अनिवार्य बनाता है।”

“इसलिए, अगर इलेक्टोरल ट्रस्ट बॉन्ड के माध्यम से दान करने की इस मिसाल को अपनाना शुरू कर देते हैं, जो प्रकट करने के मानदंडों की अनुमति नहीं देते हैं और पारदर्शिता नियमों / कानूनों को हतोत्साहित करते हैं तो यह इलेक्टोरल ट्रस्ट्स स्कीम, 2013 को शामिल किए जाने से पहले के समय में वापस जाने जैसा है। ऐसे परिदृश्य में, यह पूरी तरह से अनुचित व्यवहारों को करने जैसा होगा। अर्थात गुमनामी, अनियंत्रित और असीमित धन, काले धन का मुक्त प्रवाह, भ्रष्टाचार, विदेशी धन, कॉर्पोरेट दान और संबंधित हितों का टकराव आदि। इस तरह की प्रथा इलेक्टोरल ट्रस्ट्स स्कीम, 2013 और आईटी रूल्स, 1962 के नियम 17CA की स्थापना के पीछे का उद्देश्य को पूरी तरह से नकार देती है।”

एडीआर अपने विश्लेषण में सात चुनावी ट्रस्टों द्वारा प्रस्तुत योगदान रिपोर्ट के बारे में बताया है। ये सत्य इलेक्टोरल ट्रस्ट, प्रतिनिधि इलेक्टोरल ट्रस्ट, पीपुल्स इलेक्टोरल ट्रस्ट, प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट, जनहित इलेक्टोरल ट्रस्ट, बजाज इलेक्टोरल ट्रस्ट और जनप्रगति इलेक्टोरल ट्रस्ट हैं।

चुनावी ट्रस्टों द्वारा 2019-20 में किए गए चंदे का सबसे बड़ा हिस्सा बीजेपी को मिला है। भगवा पार्टी को इलेक्टोरल ट्रस्टों से सभी राजनीतिक दलों को मिले कुल चंदे का 276.45 करोड़ रुपये या 76.17 फीसदी मिला। इसके बाद कांग्रेस पार्टी को सभी सात चुनावी ट्रस्टों से सभी पार्टियों को मिले कुल चंदे का 58 करोड़ रुपये या 15.98 फीसदी मिला।

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