Source: 
Author: 
अंकित गुप्ता
Date: 
20.10.2020
City: 

बिहार चुनावों के लिए पहले चरण का मतदान होने में एक हफ्ते का वक्त बचा है. लेकिन इन सबके बीच जो उम्मीदवार पहले चरण में जनता के बीच जा रहे हैं उनका रिपोर्ट कार्ड भी सामने आ गया है. इस रिपोर्ट कार्ड के मुताबिक पहले चरण में 1064 उम्मीदवार जनता के बीच जा रहे हैं और इन 1064 में से 31 फीसदी से ज़्यादा ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और इनमें से भी 2 दर्जन से ज्यादा ऐसे हैं जिनके खिलाफ महिलाओं से जुड़े हुए गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

सामने जानकारी के मुताबिक 30 फ़ीसदी से ज्यादा उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, ये ऐसे मामले हैं जो गैर ज़मानती है और जिनमें 5 साल से ज्यादा की सजा का प्रावधान है.

एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले चरण में जनता के बीच जा रहे 1064 उम्मीदवारों में से 328 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं वही इन 328 में से 244  यानी कुल उम्मीदवारों में से 23 फ़ीसदी उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

आरजेडी

अगर पार्टी के हिसाब से देखें तो आरजेडी के 41 उम्मीदवारों के हलफनामे खंगालने के बाद पता चला कि उनमें से 73 फ़ीसदी उम्मीदवारों यानी 30 उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं इन 30 वैसे भी 22 उम्मीदवार यानी 54 यानी 54 फ़ीसदी ऐसे हैं है जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं.

बीजेपी

बीजेपी के उम्मीदवार भी ज्यादा पीछे नहीं है. बीजेपी के जिन 29 उम्मीदवारों के हलफनामे देखे गए उसमें से 21 उम्मीदवार यानी 72 फ़ीसदी ऐसे निकले जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और इन 29 में से 13 उम्मीदवार (45%) ऐसे थे जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं.

एलजेपी

एलजेपी के 41 उम्मीदवारों के हलफनामे देखने से पता चलता है कि उसके 59 फीसदी उम्मीदवार यानी 41 में से 24 ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और इन 41 उम्मीदवारों में से 20 यानी 49 फ़ीसदी ऐसे हैं जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं.

कांग्रेस

कांग्रेस के 21 उम्मीदवारों के हलफनामे देखने के बाद पता चला कि 21 में से 12 ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं इन 21 में से 9 यानी 43 फ़ीसदी ऐसे हैं जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मुकदमे हैं.

जेडीयू

वहीं जेडीयू के 35 उम्मीदवारों के हलफनामे देखने के बाद पता चलता है कि 35 में से 15 यानी 43 फ़ीसदी ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं  और इनमें से 10 यानी 29 फ़ीसदी के खिलाफ गंभीर आपराधिक मुकदमे हैं.

बीएसपी

इसी तरह से बहुजन समाज पार्टी के 26 उम्मीदवारों के हलफनामे देखने के बाद पता चलता है कि उसके 31 फ़ीसदी उम्मीदवार यानी 8 उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और इनमें से 5 उम्मीदवार यानी 19 फ़ीसदी के खिलाफ गंभीर आपराधिक मुकदमे है.

इतना ही नहीं महिला अपराधों के बारे में बात की जाए तो इन चुनावों में 29 उम्मीदवार ऐसे भी जनता के बीच पहुंच रहे हैं जिनके खिलाफ महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों से जुड़े हुए मामले दर्ज हैं. इन 29 में से 3 तो ऐसे हैं जिनके खिलाफ बलात्कार की धाराओं में तक मामला दर्ज है.

बात की जाए हत्या जैसे संगीन अपराधों में शामिल होने की तो 21 उम्मीदवार ऐसे भी सामने आए हैं जिनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज है तो वहीं 62 उम्मीदवारों के खिलाफ हत्या की कोशिश करने की धारा के तहत मामला दर्ज किया जा चुका है.

यानी इन आंकड़ों से साफ है कि पहले चरण में जो भी उम्मीदवार जनता के बीच जा रहे हैं उसमें से करीब एक तिहाई आपराधिक छवि वाले उम्मीदवार हैं. चुनाव आयोग भी साफ कर चुका है कि आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों के बारे में पूरी जानकारी ऐड के माध्यम से जनता के बीच  पहुंचाई जाए और ये हो भी रहा है.

ऐसे में अब जब यह जानकारी जनता के बीच पहुंच चुकी है तो बिहार की जनता को ही तय करना है कि आखिर वह किस तरह का उम्मीदवार अपने प्रतिनिधि के तौर पर चुनते हैं? क्योंकि अगर राजनीति से अपराधीकरण को दूर करना है तो ऐसे आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों से भी जनता को दूरी बनानी जरूरी है.

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