Source: 
Madhya Pradesh Times
Author: 
Date: 
28.08.2021
City: 
New Delhi

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भाजपा को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। इस बार उन्‍होंने सत्‍तारूढ़ दल को उसकी इनकम में बढ़ोतरी पर घेरा है। राहुल गांधी ने भाजपा को मिलने वाले चंदे में बढ़ोतरी से जुड़ी रिपोर्ट को लेकर शनिवार को सत्तारूढ़ पार्टी पर निशाना साधा है। उन्‍होंने सवाल किया कि भाजपा की आय 50 फीसदी बढ़ गई, लेकिन क्या जनता की आमदनी बढ़ी। उन्होंने ट्वीट किया, 'भाजपा की आय 50 फीसदी तक गढ़ गई। और आपकी?' कांग्रेस नेता ने 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' (एडीआर) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह तंज कसा। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019-20 में भाजपा की आय में 50 फीसदी तक इजाफा हुआ। इसमें सबसे बड़ा योगदान चुनावी बॉन्ड के जरिये मिले चंदे का रहा। इस दौरान सत्‍तारूढ़ दल की इनकम बढ़कर 3,623.28 करोड़ रुपये हो गई। यह रिपोर्ट शुक्रवार को जारी हुई थी। इसमें तमाम पार्टियों की इनकम का ब्‍योरा दिया गया है। रिपोर्ट कहती है कि मुख्‍य विपक्षी दल कांग्रेस की आय इस अवधि में 25.69 फीसदी घटी है। यह घटकर 682.21 करोड़ रुपये हो गई। क्‍या कहती है रिपोर्ट? रिपोर्ट के अनुसार, 2019-20 में 7 राष्‍ट्रीय दलों ने मिलकर अलग-अलग स्रोतों से 4758.20 करोड़ रुपये जुटाए। इनमें भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी, सीपीआई (एम), सीपीआई और बसपा शामिल हैं। जिन स्रोतों से पैसा जुटाया गया, उनमें डोनेशन, इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड इत्‍यादि शुमार हैं। सात राष्‍ट्रीय दलों की कुल इनकम की 76.15 फीसदी हिस्‍सेदारी भाजपा की है। इसके पहले रोजगार और रिजर्वेशन पर घेरा राहुल गांधी ने शुक्रवार को नौकरी में आरक्षण को लेकर सरकार के समक्ष सवाल उठाया था। उन्‍होंने पूछा था कि जब नौकरी ही नहीं रहेगी तो इसका क्या उपयोग रह जाएगा? कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने नए कृषि कानूनों को लेकर भी सरकार पर हमला किया और इन्हें वापस लेने की मांग की। राहुल गांधी ने 'इंडिया ऑन सेल' हैशटेग के साथ ट्वीट किया, 'मित्रि'करण की सूनामी। न रोजगार है और न आने वाले सालों में होगा तो आरक्षण का क्या मतलब?' केंद्र सरकार ने आने वाले वर्षों में छह लाख करोड़ रुपये जुटाने के लिए राष्ट्रीय मौद्रिकरण नीति का ऐलान किया है। इसे लेकर राहुल गांधी केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर हैं। एक अन्य ट्वीट में कांग्रेस नेता ने कहा, 'खेत को रेत नहीं होने देंगे, मित्रों को भेंट नहीं देने देंगे। कृषि विरोधी कानून वापस लो!'

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