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Date: 
25.01.2017
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नेताओं के ऊपर देश को चलाने की ज़िम्मेदारी होती है और आम आदमी की उम्मीद यही होती है कि नेता पूरी ईमानदारी के साथ अपना काम करेंगे। लेकिन जब यही राजनीतिक पार्टियां अपनी आय की जानकारी नहीं देती हैं, तो इन पार्टियों के चरित्र पर शक होता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस देश की राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों के 69% पैसे का कोई हिसाब किताब नहीं है। देश के राजनीतिक दलों की कमाई के नए आंकड़े आज हमारे पास आ गये हैं। अपनी कमाई के बारे में ये पार्टियां तो आपको कभी नहीं बताएंगी.. लेकिन आज हम इनके बारें में आपको पूरी जानकारी देंगे। 

हमारी इस ख़बर को देखते हुए आपके मन में ये बात आएगी कि अगर कोई आम आदमी अपनी कमाई की पूरी जानकारी सरकार या Income Tax Department को नहीं देता है, तो उसके खिलाफ हर तरह की कार्रवाई होती है.. लेकिन जब कोई राजनीतिक पार्टी चालाकी से अपनी कमाई का हिसाब किताब नहीं देती.. तो उसके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती? अगर आम आदमी किसी अज्ञात Source का पैसा अपने पास नहीं रख सकता तो फिर राजनीतिक पार्टियों को इसका लाइसेंस किसने दिया ? देश के आम आदमी के मन में आज इस दोहरे रवैये को लेकर बहुत से सवाल हैं। क्योंकि देश में अलग अलग लोगों के लिए अलग नियम नहीं हो सकते हैं। 

चुनाव सुधारों पर काम करने वाली संस्था ADR यानी Association for Democratic Reforms ने भारत की सभी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों और 51 क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों की आय का विश्लेषण किया है। इस रिपोर्ट में 2004-05 से लेकर 2014-15 के बीच 11 वर्षों के आंकड़े शामिल किए गये हैं। इस रिपोर्ट की पहली बड़ी बात ये है कि 2004 से 2015 के बीच इन राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों की कुल आय 11 हज़ार 367 करोड़ 34 लाख रुपये थी। 

अब सवाल ये है कि इसमें से कितना पैसा इन पार्टियों को ज्ञात स्रोत से मिला है। यहां ज्ञात स्रोत का मतलब उस पैसे से है, जो 20 हज़ार रुपये से ज्यादा के चंदे के तौर पर इन पार्टियों को मिला है। और जिसके सारे Details दिए गये हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन 11 वर्षों में इन क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियों को 20 हज़ार रुपये से ज्यादा के चंदे के तौर पर सिर्फ 1 हज़ार 835 करोड़ रुपये मिले हैं, जो इनकी कुल आय का सिर्फ 16 प्रतिशत है। 

इन राजनीतिक दलों को अचल संपत्ति, सदस्यता शुल्क, बैंक ब्याज जैसे स्रोतों से भी आय हुई है। और ये आय भी ज्ञात स्रोत के दायरे में ही आती है। ऐसे ज्ञात स्रोतों से इन पार्टियों को 1 हज़ार 698 करोड़ रुपये की आय हुई है। यानी इनकी कुल आय का 15 प्रतिशत। इस तरह 16 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की आय को जोड़ दें तो कुल मिलाकर 31 प्रतिशत की आय का हिसाब किताब मिलता है।

हैरानी की बात ये है कि हमारे देश की 6 राष्ट्रीय और 51 क्षेत्रीय पार्टियों की 69% आय का कोई हिसाब किताब नहीं है। और ये Income है, 7 हज़ार 832 करोड़ रुपये। अब ज़रा ये सोचकर देखिए कि अगर देश की किसी कंपनी या व्यक्ति की इतनी बड़ी रकम का कोई हिसाब नहीं होगा, तो फिर Income Tax विभाग उसके खिलाफ क्या करेगा? ज़ाहिर है Income Tax Department उस कंपनी या व्यक्ति की जांच करेगा.. उससे पूछताछ होगी। और हो सकता है कि ऐसा करने वाले सामान्य व्यक्ति को जेल भी जाना पड़े। लेकिन राजनीतिक दलों के साथ ऐसा नहीं होता। उन्हें अपनी आय का हिसाब किताब ना देनी की पूरी सुविधा और सहूलियत मिली हुई है। 

Representation of the People Act, 1951 के section 29-C के तहत राजनीतिक दलों को 20 हज़ार रुपये से ज्यादा के चंदे की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती है। लेकिन ज़्यादातर राजनीतिक पार्टियां इस नियम का कोई ना कोई तोड़ निकाल लेती हैं।

अब एक और चौंकाने वाला आंकड़ा देखिए। 2004 से 2015 के बीच कांग्रेस पार्टी को अज्ञात स्रोत से सबसे ज्यादा पैसा मिला है। 11 वर्षों के दौरान कांग्रेस को 3 हज़ार 323 करोड़ रुपये ऐसे Sources से मिले हैं, जिनकी कोई जानकारी चुनाव आयोग को नहीं दी गई है। ये कांग्रेस की कुल आय का 83% है। बीजेपी दावे तो बड़े बड़े करती है.. लेकिन इस मामले में वो भी पीछे नहीं है... BJP को 2 हज़ार 125 करोड़ 95 लाख रुपये अज्ञात स्रोतों से मिले हैं, जो उसकी कुल आय का 65 प्रतिशत है। 

अगर Regional Parties की बात की जाए, तो समाजवादी पार्टी को सबसे ज्यादा 766 करोड़ रुपये Unknown Sources से मिले है। जो उसकी कुल आय का करीब 94% है। जबकि दूसरे नंबर पर शिरोमणि अकाली दल है, जिसे उसकी कुल आय का 86% यानी करीब 88 करोड़ रुपये अज्ञात स्रोत से मिला है। 

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली जानकारी बहुजन समाज पार्टी को लेकर मिली है। इन 11 वर्षों में BSP की आय में 2057% का इज़ाफ़ा हुआ है। जी हां आपने बिल्कुल ठीक सुना, BSP की Income में 2 हज़ार 57% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2004-05 के दौरान BSP की आय 5 करोड़ 19 लाख रुपये थी, जो 2014-15 में बढ़कर 111 करोड़ 96 लाख रुपये हो गई। 

आपको ये जानकर भी हैरानी होगी कि इन 11 वर्षों के दौरान BSP को 20 हज़ार रुपये से ज़्यादा का कोई भी चंदा नहीं मिला है। यानी इस दौरान BSP को चंदे में जो भी पैसा मिला, उसका कोई हिसाब-किताब मौजूद नहीं है। BSP के मुताबिक उसे 100 फीसदी चंदा अज्ञात स्रोतों से मिला है। 

अगर हम National Parites की बात करें, तो इन 11 वर्षों में राष्ट्रीय दलों की अज्ञात आय में 313% की बढ़ोतरी हुई है। जबकि Regional Parties की अज्ञात आय में 652% की वृद्धि दर्ज की गई है। अब आप सोचिए कि जब यही पार्टियां चुनाव जीतकर सरकार बनाती होंगी.. तो ये कैसे काम करती होंगी।

ज़ी मीडिया लगातार स्वच्छ चुनाव अभियान चला रहा है।  DNA में हम पिछले काफी समय से देश की चुनाव प्रक्रिया में मौजूद गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार का विरोध कर रहे हैं.. हम चाहते हैं कि देश में चुनाव प्रक्रिया भ्रष्टाचार और धांधली से मुक्त होनी चाहिए। अभी इस प्रक्रिया में बहुत सी खामियां हैं और देश में चुनाव सुधारों की सख्त ज़रूरत है। अब वक़्त आ गया है जब देश की राजनीतिक पार्टियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्हें अपनी कमाई के एक एक पैसे का हिसाब देश को देना चाहिए। राजनीतिक पार्टियों का Financial Audit होना चाहिए

जिस तरह किसी कंपनी के CEO पर उसके अच्छे या बुरे कामकाज की ज़िम्मेदारी होती है.. उसी तरह पार्टियों के अध्यक्ष पर ये ज़िम्मेदारी होनी चाहिए कि वो पार्टी को मिलने वाले चंदे को लेकर पारदर्शिता बरते। और ऐसा ना करने पर उसे अपराधी मानना चाहिए और जिस तरह आम आदमी Income Tax Return भरता है.. और अपनी कमाई को लेकर पारदर्शिता बरतता है। उसी तरह राजनीतिक दलों को भी अपनी कमाई का पूरा हिसाब किताब ईमानदारी से देना चाहिए.. हमें अपनी चुनाव प्रक्रिया में मौजूद सभी Loopholes को बंद करना होगा.. वर्ना हमारे देश में चुनावों से जुड़ा ये घोटाला होता रहेगा.. आप इसे लोकतंत्र घोटाला भी कह सकते हैं।
आप अंदाज़ा लगाइये कि जब अपनी अज्ञात कमाई के दम पर ये पार्टियां सरकार बना लेती हैं.. तो फिर ये किस तरह काम करती होंगी।

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