Source: 
दैनिक जागरण
http://www.jagran.com/news/national-criminal-charges-mean-more-likely-to-get-elected-gain-assets-10605570.html
Date: 
29.07.2013
City: 
New Delhi

नई दिल्ली। देश में राजनीति के अपराधीकरण रोकने को लेकर चाहे कितनी हाय तौबा क्यों न मची हो, लेकिन जमीनी सच्चाई ठीक इसके विपरीत है। एक ताजा सर्वे में कहा गया है कि साफ-सुथरी छवि वालों के लिए अभी भी राजनीति करना आसान नहीं है। उनके मुकाबले आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों के लोकसभा या विधान सभा चुनाव जीतने की ज्यादा संभावना रहती है। मौजूदा लोकसभा के ही तीस फीसद सांसदों को आपराधिक पृष्ठभूमि का पाया गया है। साथ ही यह भी उजागर हुआ है कि पिछले एक दशक में लगातार एक से ज्यादा बार चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की संपत्ति में इस अवधि के दौरान एक हजार प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफार्म [एडीआर] और नेशनल इलेक्शन वॉच [एनईडब्ल्यू] के सर्वे से यह सच्चाई उजागर हुई है। सर्वे में पाया गया है कि चुनावों में साफ-सुथरी छवि वाले लोगों के जीतने की उम्मीद जहां 12 फीसद रहती है वहीं गंभीर आपराधिक छवि वालों के लिए चुनावी राह अपेक्षाकृत ज्यादा आसान होती है। चुनावों में ऐसे लोगों के जीतने की संभावना 23 प्रतिशत बताई गई है। अपने सर्वे के लिए दोनों संगठनों ने 2004 से 2013 की अवधि के दौरान चुनाव लड़ने वाले कुल 62,847 प्रत्याशियों द्वारा दाखिल हलफनामे का सहारा लिया है। अध्ययन से पता चला है कि उपरोक्त अवधि में जिन 4,181 उम्मीदवारों ने अपना भाग्य आजमाया, उनमें से 317 प्रत्याशियों की संपत्ति में एक हजार प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। जबकि 1,615 और 684 उम्मीदवारों की संपत्ति में दो सौ व पांच सौ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। आइआइएम बेंगलूर के प्रोफेसर और एडीआर, एनईडब्ल्यू के संस्थापक त्रिलोचन शास्त्री के मुताबिक, संपत्ति में यह इजाफा वास्तव में अप्रत्याशित है। 2004 से 2013 की अवधि में सांसद या विधायक रहे नेताओं का आपराधिक रिकॉर्ड जांचने के लिए भी एडीआर और एनईडब्ल्यू ने काफी माथापच्ची की। इसके लिए दोनों संगठनों ने कुल 8,790 नेताओं का रिकॉर्ड खंगाला। ये सभी लोग उपरोक्त अवधि के दौरान संसद या विधान सभा सदस्य रहे।

दस्तावेजों के विश्लेषण में पाया गया कि निर्वाचन आयोग के समक्ष दाखिल अपने हलफनामे में मौजूदा लोकसभा के कुल 543 सदस्यों में से 162 [करीब 30 फीसद] ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की पुष्टि की है। जबकि इसी सदन के 76 [14 प्रतिशत] सांसदों ने आयोग को बताया है कि उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसी प्रकार राज्यसभा के 232 सदस्यों में से 40 ने अपने खिलाफ आपराधिक मुकदमें दर्ज होने की बात मानी है। उच्च सदन के 16 मौजूदा सदस्यों ने आयोग को सूचित किया है कि उनके खिलाफ गंभीर मामलों में अभियोग दर्ज है। देश की सभी विधान सभाओं के कुल 4,032 सदस्यों में से 1,258 [31 प्रतिशत] विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है। जबकि 15 फीसद मौजूदा विधायकों ने स्वीकार किया है कि उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों में मुकदमें दर्ज हैं।

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