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Source
News express24
Author
Krati Kashyap Journalist
Date
City
New Delhi

ElectoralFunding – केंद्र और कई राज्यों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को इलेक्टोरल ट्रस्ट के माध्यम से वित्त वर्ष 2024-25 में सबसे अधिक चंदा प्राप्त हुआ है। चुनावी फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था एडीआर की ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में इलेक्टोरल ट्रस्टों को कुल 3,826.34 करोड़ रुपये का योगदान मिला, जिसमें से 82 प्रतिशत से अधिक राशि भाजपा को दी गई।

चुनाव आयोग को सौंपी गई रिपोर्ट

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ ने यह विश्लेषण चुनाव आयोग को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर तैयार किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में पंजीकृत 20 इलेक्टोरल ट्रस्टों में से 10 ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान चंदा प्राप्त होने की जानकारी सार्वजनिक की। वहीं, पांच ट्रस्ट की रिपोर्ट नियत समय सीमा के तीन महीने बाद भी आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं थी।

एडीआर के अनुसार, कंपनियों और व्यक्तियों से कुल 3,826.3417 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि 3,826.3522 करोड़ रुपये विभिन्न राजनीतिक दलों को वितरित किए गए। नियमानुसार, किसी भी इलेक्टोरल ट्रस्ट को प्राप्त अंशदान का कम से कम 95 प्रतिशत संबंधित वर्ष में राजनीतिक दलों को देना अनिवार्य होता है। आंकड़े इसी प्रावधान के अनुरूप बताए गए हैं।

किस दल को कितनी राशि मिली

रिपोर्ट के मुताबिक, कुल वितरित राशि में सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय जनता पार्टी को मिला। भाजपा को 3,157.6549 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो कुल वितरण का 82.52 प्रतिशत है। कांग्रेस को इसी अवधि में 298.7795 करोड़ रुपये मिले, जो कुल राशि का 7.81 प्रतिशत है।

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही, जिसे 102 करोड़ रुपये यानी लगभग 2.67 प्रतिशत हिस्सा मिला। इसके अलावा 19 अन्य राजनीतिक दलों को मिलाकर 267.9178 करोड़ रुपये वितरित किए गए।

किन ट्रस्टों ने सबसे अधिक वितरण किया

इलेक्टोरल ट्रस्टों में ‘प्रुडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट’ ने सबसे अधिक 2,668.4647 करोड़ रुपये 15 राजनीतिक दलों को दिए। इसके बाद ‘प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट’ का स्थान रहा, जिसने 10 दलों को 914.97 करोड़ रुपये का योगदान दिया। इन दोनों ट्रस्टों की हिस्सेदारी कुल वितरण में प्रमुख रही।

दानदाताओं का ब्यौरा

एडीआर की रिपोर्ट बताती है कि 228 कॉरपोरेट संस्थानों ने मिलकर करीब 3,636.819 करोड़ रुपये का चंदा दिया। वहीं 99 व्यक्तियों ने कुल 187.6227 करोड़ रुपये का योगदान किया। शीर्ष 10 दानदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 1,908.8621 करोड़ रुपये रही, जो कुल चंदे का करीब 49.89 प्रतिशत है।

सबसे बड़े दानदाता के रूप में इलेवेटेड एवेन्यू रिएल्टी एलएलपी का नाम सामने आया, जिसने 500 करोड़ रुपये दिए। टाटा एंड संस ने लगभग 308.1324 करोड़ रुपये का योगदान किया। टाटा कंसल्टेंसी ने 217.6216 करोड़ रुपये और मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने 175 करोड़ रुपये का चंदा दिया।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 1,065.2048 करोड़ रुपये के दानदाताओं के पते का खुलासा नहीं हुआ। इस राशि का बड़ा हिस्सा प्रुडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट को प्राप्त हुआ।

चुनावी फंडिंग को लेकर यह रिपोर्ट राजनीतिक दलों की वित्तीय स्थिति और कॉरपोरेट योगदान की प्रवृत्ति पर नई चर्चा को जन्म दे सकती है।


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