Skip to main content
Source
TNP News
Date

बिहार चुनाव में 10 पार्टियों को चंदा के तौर पर 281 करोड़ रुपये मिले, जबकि उनका कुल खर्च 193.466 करोड़ रुपये रहा। इस तरह जमा किए गए फंड और बताए गए खर्च के बीच लगभग 88 करोड़ रुपये का अंतर रहा।

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रमुख राजनीतिक दलों ने 281.32 करोड़ रुपये का चंदा जमा किया था, जबकि उनका कुल चुनावी खर्चा193.47 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। बता दें कि यह जानकारी चुनावी पारदर्शिता पर काम करने वाले संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR)की एक रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट में पांच राष्ट्रीय दल जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के साथ-साथ पांच क्षेत्रीय दलों राष्ट्रीय जनता दल (राजद), जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), एआईएमआईएम और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) द्वारा प्रस्तुत चुनावी खर्च और फंड जुटाने से संबंधित आंकड़ों का अध्ययन किया गया।

चंदे और खर्च के बीच 88 करोड़ रुपये का अंतर

रिपोर्ट के अनुसार, इन 10 राजनीतिक दलों ने मिलकर 281.323 करोड़ रुपये का फंड जमा किया था, जबकि चुनावी गतिविधियों पर उनका कुल खर्च 193.466 करोड़ रुपये रहा। इस प्रकार प्राप्त धनराशि और घोषित खर्च के बीच लगभग 88 करोड़ रुपये का अंतर देखा गया।

प्रचार पर सबसे अधिक राशि खर्च

चुनावी प्रचार में सबसे ज्यादा खर्च हुआ है। दलों ने प्रचार गतिविधियों पर लगभग 100.429 करोड़ रुपये खर्च किए, जो कुल खर्च का बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा यात्रा संबंधी खर्च 79.539 करोड़ रुपये रहा, जबकि उम्मीदवारों को एकमुश्त सहायता के रूप में 62.072 करोड़ रुपये दिए गए।

डिजिटल प्रचार पर भी हुआ उल्लेखनीय निवेश

सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के जरिए प्रचार-प्रसार पर राजनीतिक दलों ने 13.074 करोड़ रुपये खर्च किए। वहीं, उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों की जानकारी प्रकाशित करने संबंधी चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करने पर 3.886 करोड़ रुपये व्यय किए गए। अन्य विविध मदों में 14.804 करोड़ रुपये खर्च किए गए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुल चुनावी खर्च का 29.05 प्रतिशत हिस्सा यात्रा पर खर्च हुआ, जिससे यह प्रचार के बाद दूसरा सबसे बड़ा खर्च है।

161 दल चुनाव मैदान में, लेकिन विश्लेषण केवल 10 पर

बिहार विधानसभा चुनाव में कुल 161 राजनीतिक दलों ने भाग लिया था। इनमें छह राष्ट्रीय दल, 10 क्षेत्रीय दल और 145 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दल शामिल थे। हालांकि, एडीआर का विश्लेषण केवल उन 10 प्रमुख दलों तक सीमित रहा, जिनके वित्तीय आंकड़े उपलब्ध कराए गए थे।

बसपा ने नहीं दी फंड जुटाने की जानकारी

रिपोर्ट के मुताबिक, विश्लेषण में शामिल सभी दलों में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अकेली ऐसी पार्टी रही जिसने चुनाव के दौरान अपने केंद्रीय कार्यालय या राज्य इकाई द्वारा जुटाए गए फंड का कोई विवरण सार्वजनिक नहीं किया।


abc