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Source
Nav Bharat Times
Author
राहुल महाजन
Date
City
Chennai

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक 2024-25 में क्षेत्रीय दलों को 1,051.56 करोड़ रुपये का घोषित चंदा मिला, जो पिछले वर्ष से तीन गुना अधिक है। डीएमके सबसे ज्यादा फंड पाने वाली पार्टी रही, जबकि टीएमसी दूसरे और वाईएसआर कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही।

राजनीतिक दलों को चंदा देने में कॉरपोरेट और बिजनेस घरानों ने क्षेत्रीय दलों का भी ख्याल रखा है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को मिले 20,000 रुपये से ज्यादा के घोषित चंदे में पिछले साल की तुलना में तीन गुना से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इसमें तमिलनाडु की पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ( DMK ) को सबसे ज़्यादा चंदा मिला। डोनेशन लेने में पश्चिम बंगाल की टीएमसी दूसरे नंबर पर रही।

एडीआर की रिपोर्ट


एडीआर के मुताबिक, क्षेत्रीय दलों को 2024-25 में 1,051.56 करोड़ रुपये का चंदा मिला। 2023-24 में यह आंकड़ा 347.69 करोड़ रुपये था। पिछले दो सालों में चंदा देने वालों में 85 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। क्षेत्रीय दलों को राजनीतिक फंडिंग में कॉर्पोरेट और बिजनेस घरानों ने अपनी तिजोरी खोल दी। उन्होंने 2024-25 में कुल मिलाकर 644.93 करोड़ रुपये का चंदा दिया, जो पिछले साल दिए गए 227.61 करोड़ रुपये के चंदे से लगभग तीन गुना ज़्यादा है। दोनों फाइनेंशियल ईयर में कॉर्पोरेट और बिजनेस घरानों ने राजनीतिक दलों को 650 बार चंदा दिया। कुल मिलाकर बड़े दानदाताओं ने 872.54 करोड़ रुपये का चंदा दिया।

चंदा देने वालों की संख्या में बड़ा इजाफा


चंदा देने में व्यक्तिगत दानदाता पीछे नहीं रहे। उन्होंने दो सालों में 5,647 बार योगदान दिया। ज्यादातर लोग 20 हजार रुपये वाली कैटिगरी में चंदा देते हैं। ऐसे चंदा देने वालों ने दलों को 193.95 करोड़ रुपये दिए, जो चंदे की कुल वैल्यू का लगभग 14 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में व्यक्तिगत चंदे की संख्या बढ़ी, लेकिन उनकी कुल वैल्यू कम हो गई। हालांकि खुलकर चंदा देने वालों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ।

गुप्त दान देने वालों की बढ़ोतरी
रिपोर्ट में बिना जानकारी वाले दानदाताओं (undeclared donors) से मिलने वाले चंदे में भी भारी बढ़ोतरी की बात कही गई है। यह 2023-24 में 6.62 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 302.67 करोड़ रुपये हो गया, जिससे चंदे की कुल वैल्यू में उनकी हिस्सेदारी लगभग 29 प्रतिशत तक पहुंच गई। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को बिना जानकारी वाले दानदाताओं से सबसे ज़्यादा 300.64 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जो उस साल उसके कुल घोषित चंदे का 82 प्रतिशत से ज़्यादा था। डीएमके ने 365.78 करोड़ रुपये का चंदा घोषित किया। इसके बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) 184.96 करोड़ रुपये और वाईएसआर कांग्रेस 140.04 करोड़ रुपये के साथ रही।


abc