देश के क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता और उनके आय-खर्च को लेकर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान देश के प्रमुख 36 क्षेत्रीय दलों की कुल घोषित आय में पिछले वर्ष की तुलना में 51.57% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।, जहां वित्त वर्ष 2023-24 में इन दलों की कुल कमाई ₹2463.175 करोड़ थी, वहीं वित्त वर्ष 2024-25 में यह घटकर महज ₹1192.944 करोड़ रह गई है। देश की राजनीति और राजनेताओं का विश्लेषण करने वाली गैर सरकारी ऐजेंसी एडीआर के मुताबिक, आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) देश के सभी क्षेत्रीय दलों में सबसे अमीर पार्टी बनकर उभरी है। टीडीपी ने इस अवधि में अकेले ही कुल क्षेत्रीय राजनीतिक फंड का करीब 19% हिस्सा हासिल किया है। दूसरी ओर, चुनावी और प्रशासनिक खर्चों के मामले में वाईएसआर कांग्रेस ने अपनी कुल आय से भी 142.33% अधिक राशि खर्च करके शीर्ष स्थान हासिल किया है। टीडीपी और तृणमूल की तिजोरी में ज्यादा भारत निर्वाचन आयोग को सौंपे गए ऑडिट दस्तावेजों के आधार पर, विश्लेषण में शामिल 36 दलों में से टीडीपी ने सर्वाधिक ₹228.315 करोड़ की वार्षिक आय घोषित की है, जो सभी दलों की कुल आय का 19.14% है। इसके बाद ममता बनर्जी की ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) ₹219.3538 करोड़ (18.39%) के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस ₹140.386 करोड़ (11.77%) के साथ तीसरे पायदान पर रही। रिपोर्ट के अनुसार, देश के शीर्ष 5 क्षेत्रीय दलों की कुल आय ₹821.867 करोड़ रही, जो सभी 36 दलों की सामूहिक आय का 68.89% है। हालांकि, इस मंदी के दौर में भी 19 राजनीतिक दलों ने अपनी आय में बढ़ोतरी दर्ज की है, जबकि 17 दलों की आय में भारी गिरावट आई। आय में सबसे ज्यादा वृद्धि ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एडीएमके) ने दर्ज की, जिसकी तिजोरी में ₹39.248 करोड़ का इजाफा हुआ। वाईएसआर कांग्रेस और बीजद खर्च में आगे वित्त वर्ष 2024-25 में इन 36 क्षेत्रीय दलों का कुल घोषित खर्च ₹1433.068 करोड़ रहा, जो कि उनकी कुल आय से भी अधिक है। देश के 21 क्षेत्रीय दलों ने इस साल अपनी कमाई की सीमा को लांघकर अधिक राशि खर्च की। खर्च के मामले में शीर्ष 5 दलों ने कुल बजट का 77.567% यानी ₹1111.582 करोड़ खर्च कर डाले। इसमें वाईएसआर कांग्रेस ने सबसे ज्यादा ₹340.203 करोड़ (कुल खर्च का 23.739%) खर्च किए। पार्टी ने अपनी मूल आय से ₹199.817 करोड़ ज्यादा खर्च किए हैं। इसके बाद बीजू जनता दल (बीजद) ₹288.44 करोड़ (20.127%) खर्च कर दूसरे स्थान पर रही। तृणमूल कांग्रेस (AITC): ₹227.5989 करोड़ (15.882%) का कुल व्यय दिखाया है। वहीं भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने ₹180.599 करोड़ (12.602%) का खर्च किया। अखिलेख यादव की समाजवादी पार्टी ₹74.741 करोड़ (5.215%) खर्च कर पांचवें स्थान पर रही। वहीं इसके विपरीत, टीडीपी के पास ₹166.985 करोड़ की राशि बिना खर्च किए बची रही, जबकि मनसे (एमएनएस) के पास ₹36.268 करोड़ अनस्पेंट रहे। फंडिंग का जरिया: स्वैच्छिक चंदा और बैंक ब्याज क्षेत्रीय दलों की कमाई के स्रोतों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि आज भी उनकी आय का सबसे बड़ा हिस्सा स्वैच्छिक योगदान से आता है। कुल आय का 58.876% यानी ₹702.362 करोड़ चंदे के माध्यम से प्राप्त हुए। चंदा जुटाने में भी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ₹184.08 करोड़ और वाईएसआर कांग्रेस ₹140.05 करोड़ के साथ सबसे आगे रहीं। इसके अलावा राजनीतिक दलों ने अपनी कुल आय का 23.24% यानी ₹277.213 करोड़ बैंक ब्याज के जरिए कमाया। 31 दलों ने समय पर नहीं दिया ब्यौरा एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक वित्तीय ऑडिट रिपोर्ट सौंपने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2025 थी। लेकिन केवल 15 दलों ने समय पर रिपोर्ट दी। 21 दलों ने 2 से 96 दिनों की देरी से ब्योरा सौंपा। हैरान करने वाली बात यह है कि 207 दिन बीत जाने के बाद भी द्रमुक (डीएमके), शिवसेना, शिवसेना (यूबीटी), राकांपा (एनसीपी), राकांपा (शरद पवार) और नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसे 31 बड़े क्षेत्रीय दलों की रिपोर्ट अब तक चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध ही नहीं है।
