नई दिल्ली से आई ADR (Association for Democratic Reforms) की रिपोर्ट ने एक बार फिर भारतीय राजनीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं-राज्यसभा के 229 सांसदों में से 73 यानी करीब 32% सांसदों ने खुद ही अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। सोचने वाली बात ये है कि जब कानून बनाने वाले ही आरोपों से घिरे हों, तो सिस्टम कितना मजबूत होगा? गंभीर अपराधों के आरोपी भी बना रहे हैं कानून रिपोर्ट के अनुसार, 36 सांसदों पर गंभीर आपराधिक मामले हैं। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे केस शामिल हैं। एक सांसद पर हत्या का केस, चार पर हत्या की कोशिश और तीन पर महिलाओं से जुड़े अपराधों के मामले दर्ज हैं। यह आंकड़े सीधे तौर पर राजनीति की गंभीर स्थिति को दिखाते हैं। इस रिपोर्ट में, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच ने राज्यसभा के 233 में से 229 सांसदों के आपराधिक, वित्तीय और अन्य पृष्ठभूमि विवरणों का विश्लेषण और अद्यतन किया है। मौजूदा राज्यसभा में झारखंड की एक सीट खाली है। तीन सांसदों का विश्लेषण नहीं किया जा सका, क्योंकि उनके हलफनामे उपलब्ध नहीं थे। इस विश्लेषण में हाल ही में चुने गए 37 सदस्य भी शामिल हैं। हर पार्टी में मौजूद हैं ऐसे सांसद अगर आप सोचते हैं कि यह समस्या सिर्फ एक पार्टी तक सीमित है, तो ऐसा नहीं है। लगभग हर बड़ी पार्टी में ऐसे सांसद मौजूद हैं। BJP, कांग्रेस, TMC, AAP, CPM, BRS-सभी पार्टियों के सांसदों ने अपने हलफनामे में केस घोषित किए हैं।अगर आप सोचते हैं कि यह समस्या सिर्फ एक पार्टी तक सीमित है, तो ऐसा नहीं है। लगभग हर बड़ी पार्टी में ऐसे सांसद मौजूद हैं। BJP, कांग्रेस, TMC, AAP, CPM, BRS-सभी पार्टियों के सांसदों ने अपने हलफनामे में केस घोषित किए हैं। पार्टी-वार डेटा के अनुसार BJP के 99 में से 27 (27%), कांग्रेस के 28 में से 12 (43%), तृणमूल कांग्रेस के 13 में से चार (31%), आम आदमी पार्टी के 10 में से चार (40%), CPM के तीनों और भारत राष्ट्र समिति के तीनों सांसदों ने अपने हलफनामों में अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। यह संख्या DMK के 8 में से 2 सांसदों, YSRCP के 7 में से 2, AIADMK के 5 में से 2, समाजवादी पार्टी के 4 में से 2, और RJD के 3 में से 2 सांसदों के लिए है। अब ‘करोड़पतियों’ का क्लब बनती जा रही है संसद! अब बात पैसों की करें तो तस्वीर और भी चौंकाने वाली है। रिपोर्ट बताती है कि 31 सांसद यानी 14% सांसद अरबपति हैं। यानी जिनके पास 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। कुल मिलाकर राज्यसभा सांसदों की संपत्ति 27,638 करोड़ रुपये है और औसत संपत्ति 120 करोड़ रुपये से ज्यादा है। सबसे अमीर सांसद बंदी पार्थ सारथी हैं, जिनकी संपत्ति 5,300 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है। उनके बाद उनके बाद AAP के राजिंदर गुप्ता हैं, जिनकी संपत्ति 5,053 करोड़ रुपये से ज़्यादा है, और YSRCP के अल्ला अयोध्या रामी रेड्डी हैं, जिनकी संपत्ति 2,577 करोड़ रुपये से ज़्यादा है। कौन हैं राज्यसभा के सबसे गरीब सांसद? दूसरी ओर, AAP सांसद संत बलबीर सिंह सबसे गरीब हैं, जिनकी संपत्ति लगभग 3 लाख रुपये है। उनके बाद मणिपुर के महाराजा संजाओबा लीशेम्बा हैं, जिनकी संपत्ति लगभग 5 लाख रुपये है, और TMC के प्रकाश चिक बराइक हैं, जिनकी संपत्ति लगभग 9 लाख रुपये है। ADR और Election Watch की यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं है, बल्कि एक चेतावनी है। यह बताती है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और सख्ती की कितनी जरूरत है।
