बेहद आश्चर्य की बात है कि देश के जिस मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की हालत पस्त है, भाजपा-नीत एनडीए के बारह सालों के शासन में जिसे बड़ी-बड़ी बातों के बावजूद अपने हाल पर छोड़ दिया गया, उसने राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने के लिए बने चुनावी ट्रस्टों को सबसे ज्यादा धन दिया है और इन ट्रस्टों ने सबसे ज्यादा चंदा भाजपा को दिया है। यह तथ्य एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के ताज़ा अध्ययन से उजागर हुआ है। आखिर इस तथ्य के पीछे का सत्य क्या है? सीबीडीटी में पंजीकृत 20 चुनावी ट्रस्टों में केवल दस ने वित्त वर्ष 2024-25 में कॉरपोरेट क्षेत्र व व्यक्तियों से प्राप्त धन और राजनीतिक पार्टियों को दिए गए चंदे का विवरण दिया है। इन ट्रस्टों को इस दौरान मिली कुल रकम 3826.35 करोड़ रुपए है। इसमें से मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र ने सबसे ज्यादा 1063.13 करोड़ रुपए का योगदान दिया है जो कुल रकम का 27.78% बनती है। इसके बाद रीयस एस्टेट 629.17 करोड़ रुपए (16.44%), संचार, आईटी व टेलिकॉम 451.86 करोड़ रुपए (11.81%) और फाइनेंस 389.86 करोड़ रुपए (10.19%) का नंबर आता है। इन ट्रस्टों ने कुल प्राप्त रकम में से 3142.66 करोड़ रुपए (82.52% हिस्सा) भाजपा को दिया है। मतलब, इस वक्त चंदे के बदले धंधा देना ही सरकार की रीत बन गई है और मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र के सामने इसे निभाने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है।
