Skip to main content
Source
Punjab Kesari:
Date

2024 lok sabha assembly elections adr  election bjp congress

2024 के लोकसभा और चार राज्यों के विधानसभा चुनाव न सिर्फ राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहे, बल्कि पैसों के लिहाज़ से भी ये बेहद चर्चा में रहे। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, इस चुनावी दौर में कुल ₹3352.81 करोड़...

2024 के लोकसभा और चार राज्यों के विधानसभा चुनाव न सिर्फ राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहे, बल्कि पैसों के लिहाज़ से भी ये बेहद चर्चा में रहे। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, इस चुनावी दौर में कुल ₹3352.81 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिसमें अकेले भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हिस्सा लगभग आधा रहा।

BJP बनी खर्च में नंबर वन पार्टी

BJP ने चुनाव प्रचार, यात्राएं और अन्य गतिविधियों पर कुल ₹1494 करोड़ रुपये खर्च किए। इसका मतलब है कि कुल चुनावी खर्च का करीब 44.56% हिस्सा सिर्फ BJP ने अकेले उठाया। 11 साल से केंद्र की सत्ता से बाहर रही कांग्रेस ने भी पीछे हटने का नाम नहीं लिया और उसने ₹620 करोड़ खर्च किए, जो कुल खर्च का 18.5% है।

कहां खर्च हुआ सबसे ज्यादा पैसा?

चुनाव प्रचार के लिए दलों ने दिल खोलकर पैसा खर्च किया। प्रचार-प्रसार पर सभी दलों ने मिलाकर ₹2008 करोड़ खर्च किए, जो कुल खर्च का 53% है।

  • स्टार प्रचारकों की यात्राओं पर ₹765 करोड़
  • अन्य यात्रा खर्चों पर ₹795 करोड़
  • कार्यकर्ताओं पर खर्च सिर्फ ₹30 करोड़ रहा

इससे साफ है कि बड़े चेहरों की रैलियों और मीडिया प्रचार को प्राथमिकता दी गई, जबकि जमीनी कार्यकर्ताओं पर ध्यान अपेक्षाकृत कम रहा।

फंडिंग में भी राष्ट्रीय दलों का दबदबा

चुनावों के दौरान राष्ट्रीय दलों ने ₹6930.25 करोड़ रुपये जुटाए, जबकि क्षेत्रीय दलों ने कुल मिलाकर ₹515.32 करोड़ इकट्ठे किए। इस दौरान उम्मीदवारों को नकद में ₹402 करोड़ की राशि प्राप्त हुई। वहीं वर्चुअल प्रचार के लिए ₹132 करोड़ खर्च किए गए, जो डिजिटल माध्यमों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

कुछ दलों ने खर्च ‘शून्य’ दिखाया

ADR रिपोर्ट की चौंकाने वाली बात ये रही कि 690 गैर-पंजीकृत या अल्पज्ञात पार्टियों ने चुनाव लड़ा, लेकिन उनके खर्च की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, NCP, CPI, JMM और शिवसेना (उद्धव गुट) जैसे प्रमुख दलों ने भी चुनाव लड़े बावजूद इसके खर्च ‘शून्य’ दर्शाया, जो पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

खर्च रिपोर्ट जमा करने में भी हुई देरी

चुनाव आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक पार्टियों को चुनाव खत्म होने के 90 दिनों के भीतर खर्च का ब्यौरा जमा करना होता है। लेकिन कई पार्टियों ने इस नियम की अनदेखी की:

  • AAP ने रिपोर्ट 168 दिन बाद जमा की
  • BJP ने 154 दिन बाद रिपोर्ट सौंपी
  • केवल कांग्रेस ने समयसीमा के भीतर अपना खर्चीला लेखा-जोखा आयोग को सौंपा

abc