
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में चुनाव लड़ रहे लगभग 23 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अपने हलफनामों में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का खुलासा किया है। यह जानकारी 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' (ADR) और 'वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच' द्वारा गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रमुख दलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवारों में आपराधिक मामलों का अनुपात सबसे अधिक है और भाजपा के 152 में से 106 उम्मीदवारों (70 प्रतिशत) ने अपने हलफनामों में ऐसे मामलों की घोषणा की है।
तृणमूल कांग्रेस के 148 में से 63 उम्मीदवार (43 प्रतिशत), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के 98 में से 43 उम्मीदवार और कांग्रेस के 151 में से 39 उम्मीदवारों ने भी आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। एडीआर से जुड़े एक प्रतिनिधि ने कहा, ''आंकड़े एक बार फिर यह साफ कर रहे हैं कि अदालतों की बार-बार सख्त हिदायतों के बावजूद राजनीतिक दल साफ छवि के बजाय जीतने की संभावना को प्राथमिकता दे रहे हैं।''
राज्य में 23 अप्रैल को मतदान वाले 152 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ रहे 1,478 में से 1,475 उम्मीदवारों के शपथपत्रों के विश्लेषण के आधार पर यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल 345 उम्मीदवारों ने लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी दी है, जबकि 294 उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक आरोप दर्ज हैं। इनमें 19 उम्मीदवारों ने हत्या, 105 ने हत्या के प्रयास और 98 ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों की घोषणा की है। इनमें छह उम्मीदवारों पर बलात्कार से संबंधित आरोप भी शामिल हैं।
एडीआर ने 66 विधानसभा क्षेत्रों को 'रेड अलर्ट' माना है, जो कुल सीट का लगभग 43 प्रतिशत है। इन क्षेत्रों में तीन या अधिक उम्मीदवारों ने अपने हलफनामे में आपराधिक मामलों का उल्लेख किया है। वित्तीय स्थिति के विश्लेषण में सामने आया है कि 309 यानी 21 प्रतिशत उम्मीदवार करोड़पति हैं। पहले चरण के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 1.34 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति सबसे अधिक 5.70 करोड़ रुपये है।
