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Source
Rajsatta Express
Author
Rajsatta Express
Date
City
Lucknow

सामाजिक भागीदारी और सबकी हिस्सेदारी के नारों के बीच सियासत में वंशवाद की बेत खूब फल-फूल रही है। उत्तर प्रदेश में सदन की देहरी पर कदम रखने वाले हर पांचवें माननीय सियासी परिवारों से हैं। चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाली संस्था असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने शुक्रवार को जारी अपनी रिपोर्ट में यह दाना किया है। प्रदेश से देश तक के सदनों में यूपी का प्रतिनिधित्व कर रहे 23 प्रतिशत सदस्य राजनीतिक परिवारों से है।

एडीआर ने देश एवं प्रदेश के विभिन्न राज्यों के सदनों में जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे सदस्यों की पृष्ठभूमि का विश्लेषण कर रिफेटे जारी की है। इसमे विभिन्न सदनों में यूपी का प्रतिनिधित्व कर रहे 604 राजनेताओं का भी आकलन किया गया है। ये सदस्य लोकसभा, राज्यसभा, यूपी की विधानसभा व विधान परिषद का मौजूदा समय में हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें 141 सदस्य सीधे तौर पर राजनीतिक परिवार से आते हैं।

हर सदन में वंशवाद का विस्तार

रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा में यूपी के 28 सांसद परिवार की सियासी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। इसमें नेता प्रतिपक्ष व रायबरेली से कांग्रेस संसद राहुल गांधी, सपा मुखिया और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव, केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान, कीर्तिवर्धन सिंह, अपना दल (एस) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल और सरकार के पूर्व मंत्री व पीलीभीत से सांसद जितिन प्रसाद जैसे चेहरे शामिल है।

वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह के बेटे और राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया जयंत चौधरी राज्य से सांसद है। सपा से रामगोपाल यादव, भाजपा से आरपीएन सिंह और नीरज शेखर भी सियासी परिवार का ही हिस्सा है। एडीआर के आंकड़ों के मुताबिक देश और प्रदेश मिलाकर भाजपा के 17 प्रतिशत और कांग्रेस के 32 प्रतिशत माननीय राजनीतिक परिवारों से है। सपा के 161 सदस्यों में 48 सदस्य राजनीतिक परिवारों से है।

महिलाओं के कंधे पर भी विरासत का भार

एडीआर का मानना है कि महिलाओं के लिए सियासत का रास्ता भी बड़े पैमाने पर वंशवाद के जरिए ही खुला है। इसके पीछे अहम वजह उनको पर्दों के पीछे से नियंत्रित करने और साथ ही अपनी राजनीतिक पूंजी बचाए रखने की रणनीति है। रिपोर्ट के अनुसार देश भर में 18 प्रतिशत पुरुष जनप्रतिनिधि राजनीतिक परिवारों से है तो महिलाओं में यह दर 47 प्रतिशत है।

भाजपा में 41 प्रतिशत और कांग्रेस में 53 प्रतिशत महिला सांसद-विधायक राजनीतिक विरासत का हिस्सा है। यूपी की बात करे तो यहां की 69 महिला जनप्रतिनिधियों में 29 (42 प्रतिशत) परिवार की सियासी विरासत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। सपा की 67 प्रतिशत और अपना दत्त (सोनेलाल) की 40 प्रतिशत महिला सदस्य सियासी कुनबे का ही हिस्सा है।

एडीआर न अपनी रिपोर्ट में किया दावा

23 प्रतिशत सांसद-विधायक राजनीतिक परिवारी से प्रदेश के
42 प्रतिशत सदन पहुंचने वाली महिलाएं भी सियासी घरों की

कहां कितनी परिवारों की हिस्सेदारी

32 प्रतिशत सांसद-विधायक सियारी परिवारों से है कांग्रेस में
30 प्रतिशत सपा के माननीय निरासत को आगे बढ़ा रहे
17 प्रतिशत भाजपा के जनप्रतिनिधि राजनीतिक परिवारों का हिस्सा
14 प्रतिशत रालेद और सुभासपा के सवल्य वंशवाद से जुड़े
20 प्रतिशत निषाद पार्टी के जनप्रतिनिधि परिचास्वाद का हिसा


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