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Source
द सूत्र
Author
Arun Tiwari
Date
City
Raipur

रायपुर : राजनीति में वंशवाद अमरबेल की तरह है। एडीआर की ताजा रिपोर्ट बताती है कि हर पांच में से एक चुना हुआ नेता परिवारवाद से आता है। देश के कुल सांसद-विधायकों में से 1 हजार से ज्यादा वंशवाद की बढ़ती बेल के उदाहरण हैं। यहां पर लोकतंत्र में परिवार तंत्र हावी है। छत्तीसगढ़ की राजनीति में पारिवारिक वर्चस्व की जड़ें फैलती जा रही हैं।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में कुल 14 सांसद- विधायक ऐसे हैं जो सीधे तौर पर वंशवादी पृष्ठभूमि से आते हैं। इनमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य भी शामिल हैं, जबकि सबसे बड़ा हिस्सा विधानसभा के विधायकों का है। आइए आपको दिखाते हैं छत्तीसगढ़ में किस तरह फैल रही है वंशवाद की अमरबेल।

छत्तीसगढ़ की सियासत में वंशवाद

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट राजनीति में फैल रहे वंशवाद को बताती है कि किस तरह बेटा, बहू, पत्नी, भाई, भतीजे और उनके बच्चे परिवार तंत्र के सहारे विधानसभा और संसद में अपना वर्चस्व बनाए हुए हैं।

ये सांसद वंशवाद से आते हैं

छत्तीसगढ़ में दो सांसदों की पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीतिक है। एक लोकसभा से हैं और एक राज्यसभा सांसद हैं। यह दोनों सांसद कांग्रेस के हैं।

ज्योत्सना महंत : लोकसभा सांसद में केवल एक नाम है कोरबा की कांग्रेस सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत। ज्योत्सना महंत के पति चरणदास महंत प्रदेश में मंत्री रहे हैं। इसके अलावा वे केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। तीन बार लोकसभा के सांसद, छत्तीसगढ़ विधानसभा के स्पीकर और वर्तमान में विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। उनकी पत्नी ज्योत्सना महंत लगातार दूसरी बार लोकसभा सांसद बनी हैं।

रंजीत रंजन : राज्यसभा से भी कांग्रेस की एक सदस्य आती हैं। रंजीत रंजन बिहार के बाहुबली नेता राजेश रंजन यानी पप्पू यादव की पत्नी हैं। पप्पू यादव छह बार लोकसभा सांसद रहे हैं। रंजीत रंजन को कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ से राज्यसभा भेजा है।

ये हैं वंशवाद से आने वाले बीजेपी विधायक

विष्णुदेव साय : जशपुर जिले की कुनकुरी विधानसभा सीट से विधायक विष्णुदेव साय प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। उनके दादा बुद्धनाथ साय विधायक रहे हैं। चाचा नरहरी प्रसाद साय दो बार विधायक, एक बार सांसद और राज्यमंत्री रहे हैं। उनके एक और चाचा केदारनाथ साय भी विधायक रहे हैं।

अमर अग्रवाल : बिलासपुर से सीनियर विधायक अमर अग्रवाल के पिता लखीराम अग्रवाल हैं। अविभाजित मध्यप्रदेश में लखीराम अग्रवाल बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे हैं। वे छत्तीसगढ़ की राजनीति के प्रमुख नेता माने जाते रहे हैं। वे 2000-2002 तक राज्यसभा सदस्य रहे हैं।

केदार कश्यप : नारायणपुर से विधायक केदार कश्यप वर्तमान सरकार में मंत्री हैं। इनके पिता बलीराम कश्यप प्रमुख आदिवासी नेता रहे हैं। वे बस्तर से एक बार सांसद भी रहे हैं।

उद्धेश्वरी पैकरा : बलरामपुर की समरी विधानसभा सीट से विधायक हैं। इनके पति सिद्धनाथ पैकरा दो बार विधायक रहे हैं। इसके अलावा वे पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी भी रहे हैं।

विद्यावति सिदार : रायगढ़ की लैलूंगा सीट से विधायक विद्यावति सिदार के ससुर प्रेमसिंह सिदार तीन बार विधायक रह चुके हैं।

ये हैं वंशवाद से आने वाले कांग्रेस विधायक

चरणदास महंत : सक्ती से विधायक चरणदास महंत वर्तमान में छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। इनके पिता विश्नुदास महंत अविभाजित मध्यप्रदेश में लंबे समय तक मंत्री रहे हैं। वे 1952 से 1978 तक मंत्री रहे हैं।

राघवेंद्र कुमार सिंह : जांजगीर चांपा की अलकतरा सीट से विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह के पिता राकेश कुमार सिंह भी इसी सीट से विधायक रहे हैं।

लालजीत सिंह राठिया : रायगढ़ की धर्मजयगढ़ सीट से विधायक लालजीत सिंह राठिया के पिता चनेशराम राठिया छह बार विधायक रहे हैं। इस दौरान वे मंत्री भी रहे हैं।

उमेश पटेल : रायगढ़ की खरसिया सीट से विधायक उमेश पटेल के पिता नंदकुमार पटेल अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी मंत्री रहे हैं।

सावित्री मनोज मंडावी : कांकेर की भानुप्रतापपुर से विधायक सावित्री मनोज मंडावी के पति मनोज मंडावी दो बार के विधायक रहे हैं। इसके अलावा वे छत्तीसगढ़ विधानसभा में डिप्टी स्पीकर भी रहे हैं।

संदीप साहू : बलौदाबाजार की सीट कसडोल से विधायक संदीप साहू की मां पार्वती साहू कांग्रेस की महिला नेता रही हैं। वे डिस्ट्रिक्ट प्रेसीडेंट भी रह चुकी हैं।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की छत्तीसगढ़ विधानसभा में सिर्फ एक सीट है। तुलेश्वर सिंह मरकाम गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के इकलौते विधायक हैं। ये कोरबा की पाली तनखार सीट से आते हैं। उनके पिता हीरासिंह मरकाम भी विधायक रह चुके हैं।


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