एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में विजयी हुए विधायकों पर अपनी ताजा रिपोर्ट जारी की है, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान विधानसभा के 241 विधायकों में से 158 यानी लगभग 66 प्रतिशत विधायकों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले दर्ज होने की बात स्वीकार की है. इनमें से 119 विधायक यानी करीब 49 प्रतिशत पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.
हर तीसरे विधायक पर गंभीर आपराधिक आरोप: एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, गंभीर मामलों में हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण और महिला विरोधी अपराध शामिल हैं. इनमें 16 विधायक ऐसे हैं जिन पर हत्या से संबंधित धाराओं में केस दर्ज है, जबकि 30 विधायकों पर हत्या के प्रयास (IPC 307) का मामला चल रहा है. रिपोर्ट बताती है कि 8 विधायकों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोप हैं, जो राज्य की राजनीति के चरित्र को लेकर गंभीर सवाल खड़ा करता है.
पार्टीवार आपराधिक छवि के आंकड़े: एडीआर ने सभी प्रमुख दलों के विधायकों की पृष्ठभूमि का विश्लेषण किया है. BJP के 83 विधायकों में से 53 (64%) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. RJD के 72 में से 53 (74%), JD(U) के 47 में से 21 (45%), INC के 17 में से 14 (82%), CPI(ML) के 11 में से 9 (82%), HAM (Secular) के 4 में से 1 (25%), CPI(M) और CPI दोनों के 2-2 विधायकों पर 100%, AIMIM के 1 विधायक पर भी आपराधिक मामला है. जबकि 2 निर्दलीय विधायकों ने भी अपने ऊपर मामले घोषित किए हैं.

गंभीर आपराधिक मामले भी भारी संख्या में: गंभीर मामलों की श्रेणी में भी स्थिति कम चिंताजनक नहीं है. BJP के 83 में से 41 (49%), RJD के 72 में से 43 (60%), JD(U) के 47 में से 13 (28%), INC के 17 में से 9 (53%), CPI(ML) के 11 में से 8 (74%), HAM (Secular) के 4 में से 1 (25%), CPI(M), CPI, AIMIM और 2 निर्दलीय विधायक सभी पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.
बिहार के माननीय हैं अमीर: एडीआर की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 241 में से 194 विधायक (80%) करोड़पति हैं. इनकी घोषित कुल संपत्ति लगभग ₹1,12,161 करोड़ है. इसका मतलब है कि बिहार विधानसभा के अधिकांश सदस्य आर्थिक रूप से बेहद संपन्न हैं.
दलवार करोड़पति विधायकों की स्थिति देखें तो BJP के 83 में से 72 (87%), RJD के 72 में से 63 (88%), JD(U) के 47 में से 39 (83%), INC के 17 में से 13 (76%), HAM (Secular) के 4 में से 2 (50%), CPI(ML) के 11 में से 1 (9%), CPI और CPI(M) दोनों के 2 में से 1-1 (50%), AIMIM और 2 निर्दलीय विधायक (100%) करोड़पति हैं.
औसत संपत्ति, प्रति विधायक ₹4.65 करोड़: वर्तमान विधायकों की औसतन संपत्ति ₹4.65 करोड़ आंकी गई है. दलवार औसतन संपत्ति का विश्लेषण बताता है कि BJP विधायकों की औसत संपत्ति ₹3.51 करोड़, RJD की ₹5.21 करोड़, JD(U) की ₹7.08 करोड़, INC की ₹5.57 करोड़, HAM (Secular) की ₹2.07 करोड़, CPI(ML) की ₹43.52 लाख, CPI की ₹2.39 करोड़, CPI(M) की ₹64.96 लाख, AIMIM की ₹74.14 लाख और निर्दलीय विधायकों की औसत संपत्ति ₹3.01 करोड़ है.
सबसे अमीर विधायक जदयू की नीलम देवी: संपत्ति के मामले में मोकामा से जदयू विधायक नीलम देवी (बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी) शीर्ष पर हैं. उनकी घोषित कुल संपत्ति ₹80 करोड़ से अधिक है. दूसरे नंबर पर गया के बेलागंज से जदयू विधायक मनोरमा देवी (₹72 करोड़ प्लस) हैं, जबकि तीसरे स्थान पर भागलपुर से कांग्रेस विधायक अजीत शर्मा (₹43 करोड़ प्लस) हैं. ये तीनों विधायक बिहार विधानसभा में सबसे संपन्न माने गए हैं. हालांकि सबसे अधिक देनदारी भी नीलम देवी की है, उनके ऊपर 29.89 करोड़ की देनदारी है.

सबसे गरीब विधायक अलौली के रामवृक्ष सदा: दूसरी ओर, सबसे कम संपत्ति वाले विधायक राष्ट्रीय जनता दल के अलौली (खगड़िया) से रामवृक्ष सदा हैं, जिनकी कुल संपत्ति मात्र ₹70,000 घोषित की गई है. उनके बाद फुलवारी (SC) सीट से माले विधायक गोपाल रविदास हैं जिनकी संपत्ति ₹1.59 लाख, जबकि तीसरे स्थान पर पालीगंज के माले विधायक संदीप सौरभ हैं जिनकी कुल संपत्ति ₹3.45 लाख है.
शिक्षा का स्तर 5वीं से लेकर स्नातकोत्तर तक: एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक, 82 विधायक (34%) ऐसे हैं जिन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता 5वीं से 12वीं के बीच घोषित की है, जबकि 149 विधायक (62%) ने स्नातक या उससे अधिक योग्यता दर्ज कराई है. 5 विधायकों ने डिप्लोमा, और 5 ने केवल साक्षरता स्तर की शिक्षा घोषित की है.
50 + उम्र के विधायक 50% से अधिक: एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान विधानसभा में 119 विधायक (49%) ऐसे हैं जिनकी आयु 25 से 50 वर्ष के बीच है, जबकि 122 विधायक (51%) की आयु 51 से 80 वर्ष के बीच है. यानी बिहार विधानसभा में वरिष्ठ नेताओं की संख्या युवा विधायकों से थोड़ी अधिक है. वहीं रिपोर्ट के अनुसार, 241 विधायकों में से केवल 29 (12%) महिलाएं विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर रही हैं. यह आंकड़ा राज्य में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी सीमित होने का संकेत के तौर पर है.
अपराध, संपत्ति और राजनीति का संगम: वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार के मुताबिक एडीआर की यह रिपोर्ट बताती है कि बिहार की राजनीति में आपराधिक छवि और आर्थिक सशक्तिकरण का गहरा मेल दिखाई देता है. जहां एक ओर दो-तिहाई विधायक आपराधिक मामलों से घिरे हैं.
