बिहार विधानसभा चुनाव में आज का दिन सियासी तापमान को बढ़ाने वाला है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज बिहार में तीन अलग-अलग स्थानों पर जनसभाओं को संबोधित करेंगे। उनकी पहली सभा सीवान जिले के रघुनाथपुर क्षेत्र में होगी। यह वही इलाका है, जो कभी आरजेडी के कद्दावर नेता और डॉन से राजनेता बने मोहम्मद शहाबुद्दीन के नाम से जाना जाता था। शहाबुद्दीन ने 1990 के दशक में सीवान की राजनीति में ऐसा दबदबा बनाया कि विपक्षी दलों के लिए यहां कदम जमाना मुश्किल हो गया था। चार बार सांसद और एक बार विधायक रहे शहाबुद्दीन के खिलाफ हत्या, रंगदारी और बूथ कैप्चरिंग जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद उनकी राजनीतिक पकड़ बनी रही। 2008 में अदालत द्वारा चुनाव लड़ने पर रोक लगने के बाद उनकी पत्नी हेना शहाब ने राजनीति में कदम रखा लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। अब आरजेडी ने उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए लंदन से पढ़ाई कर लौटे शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब पर दांव लगाया है।
सीवान के अलावा भोजपुर और बक्सर में योगी की रैली
रघुनाथपुर सीट से एनडीए की ओर से जेडीयू प्रत्याशी विकास कुमार सिंह चुनाव मैदान में हैं। यह सीट फिलहाल आरजेडी के कब्जे में है और यहां से हरिशंकर यादव विधायक हैं। योगी आदित्यनाथ सीवान के अलावा भोजपुर और बक्सर में रैली करेंगे। ये तीनों जिले उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे हुए हैं इसलिए योगी का यह दौरा अहम माना जा रहा है। जहां योगी की हिंदुत्ववादी छवि और संगठनात्मक लोकप्रियता का सीधा असर देखने को मिलता है। सीवान में जनसभा के बाद सीएम योगी भोजपुर जिले के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में दूसरी सभा करेंगे, जबकि दिन का अंतिम कार्यक्रम बक्सर जिले में होगा। यह तीनों जिले उत्तर प्रदेश के सटे हुए हैं।
कभी शहाबुद्दीन का अभेद्य किला था सीवान
1990 के दशक में जब लालू प्रसाद यादव का दौर था, तब सीवान में शहाबुद्दीन का सिक्का चलता था। उनके विरोध में बोलना या झंडा लगाना आसान नहीं था। वे ज्यादातर चुनाव जेल में रहकर ही लड़ते रहे और जीतते रहे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। आरजेडी की पारंपरिक पकड़ के बावजूद यहां एनडीए ने पिछली बार कड़ी टक्कर दी थी। इतना ही नहीं बीते लोकसभा चुनाव में सीवान संसदीय क्षेत्र से जेडीयू की विजयलक्ष्मी देवी ने शहाबुद्दीन की पत्नी और निर्दलीय उम्मीदवार हेना शहाब को 92,857 वोटों से हराया था।
पिछला प्रदर्शन और मौजूदा समीकरण
2011 की जनगणना के मुताबिक सीवान जिले में करीब 18% मुस्लिम आबादी है। यह जनसंख्या समीकरण कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। अब तक हुए लोकसभा चुनावों में सीवान से 16 में से 8 बार मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत हुई है। जिनमें 4 बार मोहम्मद यूसुफ और 4 बार मोहम्मद शहाबुद्दीन ने जीत हासिल की। जिले में कुल 8 विधानसभा सीटें हैं। 2020 के चुनाव में एनडीए को दुरौंधा और गोरेयाकोठी की सीट मिली थी। जबकि महागठबंधन ने 6 सीटों पर जीत हासिल की थी। जिनमें 3 आरजेडी, 2 भाकपा (माले) और 1 कांग्रेस के खाते में गई। रघुनाथपुर सीट से आरजेडी के हरिशंकर यादव विधायक बने थे लेकिन इस बार पार्टी ने उनकी जगह ओसामा शहाब को मैदान में उतारा है।
करीबी मुकाबले और उम्मीद की जमीन
2020 के विधानसभा चुनाव में सीवान जिले की तीन सीटों सीवान, महाराजगंज और बरहरिया पर NDA को बेहद करीबी हार का सामना करना पड़ा था। इन सीटों पर हार का अंतर महज 2 से 4 हजार वोटों के बीच रहा। यानी राजनीतिक समीकरण में थोड़ा सा बदलाव नतीजों को पलट सकता है। इस लिहाज से योगी आदित्यनाथ का आज का दौरा भाजपा-जेडीयू गठबंधन के लिए मनोबल बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।
