एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच ने बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण में चुनाव लड़ रहे लगभग एक तिहाई उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले होने की जानकारी दी है।
इसके अलावा मैदान में उतरे हर 10 में से 4 उम्मीदवार करोड़पति हैं, जो चुनावी राजनीति में धनबल के बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हैं। यह रिपोर्ट 6 नवंबर को होने वाले पहले चरण की 121 विधानसभा सीटों के 1,303 उम्मीदवारों के स्व-घोषित हलफनामों पर आधारित है।
आपराधिक रिकॉर्ड: क्या कहती है ADR की रिपोर्ट?
पहले चरण के उम्मीदवारों में दागी नेताओं की संख्या डराने वाली है। 1,303 उम्मीदवारों में से 423 (32%) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की बात कबूल की है।
पार्टीवार हिसाब: सबसे ज्यादा दागी किसमें?
प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों का प्रतिशत इस प्रकार है, जो बताता है कि टिकट वितरण में किस पार्टी ने सबसे कम परहेज किया है:
करोड़पतियों का बोलबाला: बिहार चुनाव में धनबल का प्रभाव
बिहार की राजनीति में धनबल का सीधा प्रभाव दिख रहा है, जहां हर 10 में से 4 उम्मीदवार करोड़पति हैं।
सबसे अमीर उम्मीदवार: बीजेपी के 48 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति ₹11.30 करोड़ है, जो सभी पार्टियों में सबसे ज्यादा है। इसके बाद लोजपा (राम विलास) (₹10.88 करोड़) और राजद (₹10.37 करोड़) का स्थान है।
75% सीटें 'रेड अलर्ट' पर
रिपोर्ट में 121 में से 91 विधानसभा सीटों (75%) को "रेड अलर्ट निर्वाचन क्षेत्र" के रूप में चिह्नित किया गया है। इसका मतलब है कि इन सीटों पर तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं।
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