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Source
NPG
Author
Ragib Asim
Date
City
Bihar

Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इस बार दिग्गज उम्मीदवारों के साथ धनकुबेर नेता भी मैदान में हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच की ताज़ा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पहले चरण में लड़ रहे कुल 1303 उम्मीदवारों में से 519 (40%) करोड़पति हैं। सबसे अमीर उम्मीदवार बीजेपी के कुमार प्रणय हैं, जिनकी घोषित संपत्ति 170 करोड़ है।

कुमार प्रणय: सबसे अमीर प्रत्याशी

रिपोर्ट के मुताबिक मुंगेर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे बीजेपी प्रत्याशी कुमार प्रणय के पास कुल 170 करोड़ की संपत्ति है। वहीं महाराजगंज से निर्दलीय उम्मीदवार राज किशोर गुप्ता 137 करोड़ की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर हैं। मोकामा सीट से जेडीयू के बाहुबली नेता अनंत सिंह 100 करोड़ से अधिक की संपत्ति के साथ तीसरे सबसे अमीर उम्मीदवार हैं।

सबसे गरीब उम्मीदवार कौन?

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बिहार में कुछ उम्मीदवारों ने बहुत मामूली संपत्ति घोषित की है। दरभंगा से SUCI(C) सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) के उम्मीदवार मोजाहिद आलम ने केवल 1,000 की संपत्ति बताई है।
बाढ़ सीट से पीपल पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) के शत्रुघ्न वर्मा ने भी 1,000 संपत्ति घोषित की है। मीनापुर (मुजफ्फरपुर) से SUCI(C) के शिव कुमार यादव के पास 2,000 की कुल संपत्ति है।

क्या कहते है आपराधिक रेकार्ड

ADR रिपोर्ट के अनुसार पहले चरण में मैदान में उतरे 1303 उम्मीदवारों में से 423 (32%) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 354 (27%) उम्मीदवार गंभीर अपराधों में आरोपी हैं। 33 उम्मीदवारों ने हत्या से जुड़े मामले घोषित किए हैं, रिपोर्ट के मुताबिक 121 सीटों में से 91 सीट (75%) संवेदनशील मानी गई हैं।
महिला उम्मीदवारों की संख्या घटी
बिहार इलेक्शन वॉच के मुताबिक पहले चरण में कुल 121 महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ रही हैं, जो कुल उम्मीदवारों का सिर्फ 9.28 प्रतिशत है। राजद (RJD) ने सबसे ज्यादा 23 महिलाओं को टिकट दिया है। वहीं बीजेपी और जेडीयू ने 13-13 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। लोजपा (चिराग पासवान गुट) और कांग्रेस ने 5-5 महिला प्रत्याशी उतारे हैं।

औसत संपत्ति

रिपोर्ट के अनुसार पहले चरण में उम्मीदवारों की औसत घोषित संपत्ति 3.26 करोड़ है। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि बिहार में अब चुनाव सिर्फ जातीय या राजनीतिक समीकरण पर नहीं बल्कि धन और बाहुबल के गठजोड़ पर लड़े जा रहे हैं।

abc