Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज हो चुकी है। चुनाव दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को होंगे, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी। इस बीच, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट ने उम्मीदवारों के आपराधिक और वित्तीय रिकॉर्ड पर चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस चुनाव में मैदान में उतरे 32 प्रतिशत उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 27 प्रतिशत उम्मीदवार गंभीर अपराधों जैसे हत्या, हत्या के प्रयास और महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
इसके अलावा, उम्मीदवारों की संपत्ति में भी भारी इजाफा देखने को मिला है। रिपोर्ट बताती है कि इस बार 519 उम्मीदवार करोड़पति हैं, यानी कुल उम्मीदवारों का 40 प्रतिशत, जबकि एक उम्मीदवार की औसत संपत्ति ₹3.26 करोड़ आंकी गई है।
423 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले, 354 पर गंभीर आरोप
ADR और बिहार इलेक्शन वॉच द्वारा किए गए इस विश्लेषण में कुल 1,314 में से 1,303 उम्मीदवारों के शपथपत्रों की जांच की गई। इसमें खुलासा हुआ कि 423 उम्मीदवारों (32%) ने स्वयं पर आपराधिक मामलों की जानकारी दी है, जबकि 354 उम्मीदवारों (27%) पर गंभीर अपराधों के केस दर्ज हैं।
इनमें से 33 उम्मीदवारों पर हत्या, 86 पर हत्या के प्रयास, और 42 पर महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर आरोप हैं। वहीं, 2 उम्मीदवारों ने अपने हलफनामे में बलात्कार के आरोप होने की बात स्वीकार की है। यह आंकड़े राज्य की राजनीति में बढ़ते अपराध और राजनीति के गठजोड़ को उजागर करते हैं, जो लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए चिंता का विषय हैं।
किन पार्टियों के सबसे अधिक “दागी” उम्मीदवार?
पार्टीवार आंकड़ों पर नजर डालें तो वामपंथी दलों में CPI और CPI(M) के सभी 5-5 उम्मीदवार (100%) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं CPI(ML) के 13 में से 14 उम्मीदवार (93%) और राजद (RJD) के 70 में से 53 उम्मीदवार (76%) दागी हैं।
सत्तारूढ़ भाजपा (BJP) के 48 में से 31 उम्मीदवार (65%), कांग्रेस के 23 में से 15 (65%), एलजेपी (रामविलास) के 13 में से 7 (54%), और जदयू (JDU) के 57 में से 22 उम्मीदवार (39%) पर आपराधिक मामले हैं।
वहीं, अपेक्षाकृत साफ छवि वाली आप (AAP) के 44 में से 12 (27%), बसपा (BSP) के 89 में से 18 (20%), और जन सुराज पार्टी के 114 में से 50 (44%) उम्मीदवारों पर भी केस दर्ज हैं। यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि लगभग हर प्रमुख पार्टी में “दागी उम्मीदवारों” की भरमार है।
उम्मीदवारों की शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, इस बार चुनावी मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता भी विविध है। कुल 519 उम्मीदवार (40%) ऐसे हैं जिनकी शिक्षा कक्षा 5 से लेकर 12वीं तक है, जबकि 651 उम्मीदवार (50%) स्नातक या उससे अधिक डिग्रीधारी हैं।
वहीं, आर्थिक रूप से देखें तो उम्मीदवारों की संपत्ति में काफी इजाफा हुआ है। औसतन प्रत्येक उम्मीदवार की संपत्ति ₹3.26 करोड़ है, और कुल 519 उम्मीदवार करोड़पति हैं। यह दिखाता है कि बिहार की राजनीति में पैसा और शक्ति का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन आंकड़ों से मतदाताओं को जागरूक होना चाहिए और मतदान करते समय उम्मीदवारों की छवि, ईमानदारी और योग्यता को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि राजनीति में अपराधीकरण पर अंकुश लगाया जा सके।
