बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में 11 नवंबर को 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान होगा. कुल 1,302 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 562 करोड़पति, 415 आपराधिक पृष्ठभूमि वाले और 201 मुस्लिम उम्मीदवार शामिल हैं. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण की बात करें तो इसमें गया जिले में सबसे अधिक 125 उम्मीदवार हैं. यह चरण सीमांचल, मगध और तिरहुत क्षेत्रों में निर्णायक साबित होगा, जहां जातीय समीकरण, धनबल और वंशवाद भी देखने को मिल रहा है.
बिहार चुनाव दूसरा एक नजर:बिहार चुनाव के दूसरे चकण में कुल 1,302 प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे हैं, जिनमें 1,165 पुरुष, 136 महिलाएं और एक थर्ड जेंडर उम्मीदवार शामिल हैं. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस फेज में 3 करोड़ 70 लाख 13 हजार 556 वोटर मतदान करेंगे. इसके लिए 45,399 पोलिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिनमें 40,073 ग्रामीण क्षेत्रों में और 5,326 शहरी इलाकों में हैं.

इन जिलों में दूसरे चरण में मतदान: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में 20 जिलों की कुल 122 विधानसभा सीटों पर मतदान है. इस चरण में गया जिले की 10, कैमूर जिले की 4, रोहतास जिले की 7, औरंगाबाद जिले की 6, अरवल जिले की 2, जहानाबाद जिले की 3, नवादा जिले की 5, भागलपुर जिले की 7, बांका जिले की 5, जमुई जिले की 4, सीतामढ़ी जिले की 8, शिवहर जिले की 1, मधुबनी जिले की 10, सुपौल जिले की 5, पूर्णिया जिले की 7, अररिया जिले की 6, कटिहार जिले की 7, किशनगंज जिले की 4, पूर्वी चंपारण जिले की 12 तथा पश्चिमी चंपारण जिले की 9 विधानसभा सीटों पर 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे.

सीमांचल में मुस्लिम बहुल जैसे अररिया, किशनगंज, मगध में यादव-EBC जैसे गया, औरंगाबाद, तिरहुत में वैश्य-कुशवाहा जैसे पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी. SC/ST आरक्षित क्षेत्रों में सामाजिक न्याय महत्वपूर्ण हैं जैसे इमामगंज SC आरक्षित है.
नीतीश और तेजस्वी के बीच मुकाबला: बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनाव हमेशा से ही राज्य की दिशा तय करने वाले रहे हैं और इस बार का चुनाव नीतीश कुमार की सत्ता की मजबूती या तेजस्वी यादव के युवा नेतृत्व की परीक्षा होगा. प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी तीसरे विकल्प के रूप में उभर रही है, जो वोटों का बंटवारा कर सकती है.

नीतीश कैबिनेट के 9 मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर:दूसरे चरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 9 मंत्रियों की राजनीतिक साख दांव पर लगी है. इनमें सुपौल से बिजेंद्र प्रसाद यादव, चकाई से सुमित कुमार सिंह, झंझारपुर से नीतीश मिश्रा, अमरपुर से जयंत राज, छातापुर से नीरज कुमार सिंह बबलू, बेतिया से रेणु देवी, धमदाहा से लेशी सिंह, हरसिद्धि से कृष्णनंदन पासवान और चैनपुर से जमा खान चुनाव लड़ रहे हैं. इन नेताओं के लिए यह महज जीत-हार का सवाल नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक भविष्य का भी मामला है, क्योंकि एनडीए का प्रदर्शन इस चरण में राज्य की सत्ता की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा.

महागठबंधन के दिग्गजों का इम्तिहान:महागठबंधन की तरफ से भी कई प्रमुख चेहरे मैदान में हैं. इनमें राजद के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व स्पीकर उदय नारायण चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, कांग्रेस विधायक दल नेता शकील अहमद खान (कदवा सीट से) और भाकपा (माले) विधायक दल नेता महबूब आलम शामिल हैं. उत्तरी और सीमावर्ती जिलों में कड़ा मुकाबला होने के कारण यह चरण उनके लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.

दूसरे चरण में एनडीए की स्थिति:एनडीए इस फेज की 122 सीटों में से भाजपा 53, जदयू 44, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 15, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) 6 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) 4 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. पहले चरण में भाजपा के 48 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनके परिणाम इस चरण पर भी असर डाल सकते हैं.

महागठबंधन का फोकस: महागठबंधन में राजद 72, कांग्रेस 37, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) 10 और अन्य सहयोगी 5 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं. उनका मुख्य जोर पिछड़े और सीमावर्ती इलाकों पर है, जहां उनका परंपरागत वोट बैंक मजबूत माना जाता है.

सबसे छोटा और सबसे बड़ा विधानसभा क्षेत्र:क्षेत्रफल के हिसाब से इस चरण का सबसे छोटा क्षेत्र भागलपुर है, जो मात्र 23.887 वर्ग किमी में फैला है. वहीं, सबसे बड़ा क्षेत्र चैनपुर है, जिसका विस्तार 1,814.15 वर्ग किमी तक है. मतदाताओं की संख्या में मखदुमपुर सबसे कम (2,47,574) और हिसुआ सबसे अधिक (3,67,667) वोटरों वाला क्षेत्र है.

बिहार चुनाव का असर: बिहार विधानसभा चुनाव न केवल राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डालते हैं, क्योंकि बिहार भारत का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है जनसंख्या के लिहाज से. इस चुनाव में कुल 243 सीटों पर मुकाबला है और दूसरे चरण में आधे से अधिक सीटें शामिल हैं. मतदान के बाद 14 नवंबर को परिणाम आएंगे, जो बिहार की अगली सरकार का फैसला करेंगे. चुनाव आयोग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं, और पहले चरण में 64.46 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ था, जो दूसरे चरण में 70 प्रतिशत से अधिक होने की उम्मीद है.

2020 में किसने कितनी सीटें जीतीं?: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में जिन सीटों पर मतदान है उसमें बीजेपी को अपने 42 सीटों की रक्षा करनी होगी. पहले चरण में जेडीयू की प्रतिष्ठा दांव पर थी, तो अब बीजेपी और जीतन राम मांझी की बारी है. मांझी की हम(सेक्युलर) की सभी 4 सीटें इसी क्षेत्र में हैं. चिराग पासवान की एलजेपी(रामविलास) को भी जमुई जैसे अपने गढ़ में साबित करना होगा कि वे अभी भी प्रासंगिक हैं.

दूसरी ओर, महागठबंधन के लिए यह सत्ता की कुंजी है. आरजेडी और कांग्रेस पर ही वापसी का पूरा बोझ है. 2020 में कांग्रेस को ओवैसी की AIMIM से करारा झटका लगा था, जिसने उसके वोट काट लिए थे. आरजेडी को न सिर्फ अपनी 33 सीटें बचानी हैं, बल्कि उनमें इजाफा करना है. सीपीआई(एमएल)एल को भी अपनी 5 सीटों की हिफाजत करनी होगी. दूसरे चरण जहां मतदान है उसमें 2020 में 66 सीटें एनडीए के खाते में गई थीं, वहीं महागठबंधन ने 50 सीटें हासिल की थीं. AIMIM ने 5 और बसपा ने 1 सीट पर कब्जा जमाया था.

दूसरे चरण के उम्मीदवारों के आंकड़े:दूसरे चरण में औसतन प्रति सीट 11 उम्मीदवार हैं. सबसे अधिक 22 उम्मीदवार चैनपुर, गया टाउन और सासाराम में हैं, जहां त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबला है. सबसे कम 5 उम्मीदवार बनमनखी (SC), चनपटिया, लौरिया, रक्सौल, सुगौली और त्रिवेणीगंज (SC) में हैं, जहां सीधा मुकाबला संभावित है. सबसे उम्रदराज उम्मीदवार 88 वर्षीय भगवान मरैया (RJD, धमदहा) हैं. सबसे कम उम्र के 16 उम्मीदवार 25 वर्ष के हैं, जिनमें 9 निर्दलीय, 2 JJP, 1 AAP, 1 BSP, 1 RLJP, 1 INC और 1 KSD से हैं, जो युवा भागीदारी बढ़ाने का संकेत है.

जिला-वार उम्मीदवारों की तस्वीर:गया जिले में 10 सीटों पर 125 उम्मीदवार मैदान में हैं, जो सबसे अधिक है. यह जिला मगध क्षेत्र में है, जहां RJD का मजबूत आधार है, लेकिन NDA भी चुनौती दे रहा है. पूर्वी चंपारण में 12 सीटों पर 95 उम्मीदवार, मधुबनी में 10 सीटों पर 100, रोहतास में 7 सीटों पर 95 और कटिहार में 7 सीटों पर 87 उम्मीदवार हैं. ये जिले जातीय विविधता वाले हैं, जहां मुस्लिम, यादव और EBC वोट निर्णायक हैं.

दूसरी ओर, शिवहर में एकमात्र सीट पर सिर्फ 11 उम्मीदवार हैं, जो कम मुकाबले वाला क्षेत्र है. अररिया में 6 सीटों पर 61, अरवल में 2 सीटों पर 28, औरंगाबाद में 6 सीटों पर 76, बांका में 5 सीटों पर 58, भागलपुर में 7 सीटों पर 82, जहानाबाद में 3 सीटों पर 31, जमुई में 4 सीटों पर 41, कैमूर में 4 सीटों पर 48, किशनगंज में 4 सीटों पर 35, नवादा में 5 सीटों पर 55, पूर्णिया में 7 सीटों पर 69, सीतामढ़ी में 8 सीटों पर 85, सुपौल में 5 सीटों पर 48 और पश्चिमी चंपारण में 9 सीटों पर 72 उम्मीदवार हैं.

दलवार दावेदारी में JSP सबसे आगे:जन सुराज पार्टी (JSP) ने 120 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जो सबसे अधिक है. प्रशांत किशोर की यह पार्टी नए चेहरे लाकर राजनीति को चुनौती दे रही है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने 71, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 53, जनता दल (यूनाइटेड) (JD(U)) ने 44 और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने 37 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं. ये मुख्य गठबंधन हैं: NDA में BJP, JD(U), HAM(S), LJP(RV); महागठबंधन में RJD, INC, वाम दल.

विकासशील इंसान पार्टी (VIP) ने 7, CPI(ML)(L) ने 6 और LJP(RV) ने 15 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या 462 है, जो बागियों और स्थानीय नेताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. अन्य दलों ने 487 उम्मीदवार उतारे हैं, जिसमें AIMIM जैसी पार्टियां शामिल हैं. यह दावेदारी बहुधा मुकाबले का संकेत है.
महिला उम्मीदवार की सिर्फ 10% भागीदारी:कुल 136 महिलाएं मैदान में हैं, जो कुल उम्मीदवारों का लगभग 10% है. यह संख्या महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी की कमी दर्शाती है, बिहार में पंचायती राज में 50% आरक्षण है. निर्दलीय महिलाएं सबसे अधिक 43 हैं, जो स्वतंत्र रूप से लड़ रही हैं. RJD ने 13, JSP ने 12, BJP ने 10, JD(U) ने 9, LJP(RV) ने 3, INC ने 2 और VIP ने 1 महिला उम्मीदवार उतारा है. CPI(ML)(L) ने एक भी महिला नहीं उतारा है.
प्रतिशत के हिसाब से LJP(RV) में 20%, JD(U) में 20.45%, BJP में 18.87%, RJD में 18.31%, VIP में 14.29%, JSP में 10%, INC में 5.41% और निर्दलीय में 9.31% महिलाएं हैं. महिलाएं मुख्यतः परिवारवादी पृष्ठभूमि से हैं, जैसे दीपा कुमारी, ज्योति सिंह. यह ट्रेंड बदलाव की जरूरत दिखाता है.
70% से अधिक उच्च शिक्षित:1,302 उम्मीदवारों में से 297 ग्रेजुएट हैं, जो उच्च शिक्षा का प्रमाण है. 291 12वीं पास, 180 पोस्ट ग्रेजुएट, 116 ग्रेजुएट प्रोफेशनल (जैसे इंजीनियर, डॉक्टर), 37 डॉक्टरेट, 15 डिप्लोमा धारक हैं. निचले स्तर पर 154 10वीं पास, 67 8वीं पास, 18 5वीं पास, 117 साक्षर और 9 अनपढ़ हैं. एक ने विवरण नहीं दिया. कुल 70% से अधिक 12वीं से ऊपर हैं, जो शिक्षित नेतृत्व की ओर इशारा करता है, लेकिन अनपढ़ उम्मीदवार लोकतंत्र की विविधता दिखाते हैं.
मुस्लिम उम्मीदवारों का सीमांचल में दबदबा:दूसरे चरण में कुल 201 मुस्लिम उम्मीदवार हैं, 12 महिलाएं. कटिहार में 32, किशनगंज में 25, अररिया और पूर्णिया में 23-23. पश्चिमी चंपारण में 17, पूर्वी चंपारण और गया में 13-13. पार्टी-वार निर्दलीय 76, अन्य 60, JSP 20, AIMIM 18. मुस्लिम वोट बंट सकता है.
दूसरे चरण में 562 करोड़पति उम्मीदवार:बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 43% 562 करोड़पति उम्मीदवार हैं. इसमें सबसे ज्यादा अमीर रण कौशल प्रताप सिंह हैं जो VIP से उम्मीदवार हैं इनके पास 368 करोड़ की संपत्ति है. नहीं नीतीश कुमार जो RLJP के उम्मीदवार हैं उनके पास 250 करोड़ की समपत्ति है.
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार:बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में जो उम्मीदवार हैं उनमें से32% यानी 415 उम्मीदवारों पर केस दर्ज है. इसमें 341 पर गंभीर, 19 पर हत्या, 52 पर महिला अपराध के मामले में एफआईआर दर्ज है.
राजनीतिक वंशवाद:दूसरे चरण में30 से अधिक उम्मीदवार ऐसे है जो राजनीतिक परिवार से आते हैं. इसमें श्रेयसी सिंह, दीपा कुमारी जैसे उम्मीदवार शामिल हैं.
सुरक्षा कारणों से बदली मतदान अवधि:कई सीटों को संवेदनशील घोषित किया गया है. इमामगंज के 7 बूथों पर दोपहर 3 बजे तक, 354 बूथों पर शाम 4 बजे तक मतदान होगा. बोधगया में 200 बूथों पर 4 बजे तक और 106 बूथों पर 5 बजे तक वोटिंग होगी. चैनपुर, रजौली, गोविंदपुर, सिकंदर, जमुई, झाझा और चकाई के सभी बूथों पर शाम 4 बजे तक मतदान संपन्न कराया जाएगा.
पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान:चुनाव आयोग के अनुसार, पहले फेज में 65.08% मतदान दर्ज किया गया. समस्तीपुर में सबसे अधिक 71.74% और पटना में सबसे कम 59.02% वोटिंग हुई. भाजपा-जदयू ने इसे जनसमर्थन की जीत बताया, जबकि महागठबंधन ने सत्ता-विरोधी लहर का संकेत माना.
अब सभी की निगाहें 11 नवंबर पर टिकी हैं, जब यह स्पष्ट होगा कि जनता किसे सत्ता सौंपेगी. दूसरे चरण के परिणाम बिहार की राजनीति की दिशा तय करेंगे और यह भी बताएंगे कि मतदाता नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ हैं या राजद-कांग्रेस के महागठबंधन को मौका देंगे. परिणाम 14 नवंबर 2025 को घोषित होंगे.
