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Source
आज तक
Author
संजय शर्मा
Date
City
New Delhi

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के साथ ही राज्य की नई 18वीं विधानसभा के बारे में एक अहम आंकड़ा सामने आया है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और इलेक्शन वॉच के अध्ययन के अनुसार, इस बार चुने गए कुल 243 विधायकों में से 130 यानी 53% के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें से 102 विधायक, यानी लगभग 42% पर हत्या, हत्या का प्रयास, महिलाओं के प्रति अपराध और अपहरण जैसे गंभीर आरोपों वाले मामले चल रहे हैं.

पिछली विधानसभा की तुलना में इस बार दागी विधायकों की संख्या में कमी जरूर आई है, लेकिन तस्वीर अब भी चिंताजनक है. पिछली विधानसभा में 243 में से 163 विधायक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले थे, जो कुल का 68% था. इनमें से 123 यानी 51% पर गंभीर अपराधों के मामले थे.

वर्तमान विधानसभा में हत्या के आरोप झेलने वाले विधायकों में बीजेपी और जेडीयू के तीन-तीन विधायक शामिल हैं. हत्या के प्रयास (अटेम्प्ट टू मर्डर) के मामलों में बीजेपी और जेडीयू के सात-सात विधायक हैं, जबकि एलजेपी और राजद के दो-दो विधायकों पर ऐसे मामले दर्ज हैं. कम्युनिस्ट पार्टी के एक विधायक पर भी ऐसा ही आरोप है.

एलजेपी के एक विधायक पर महिला के खिलाफ अपराध का मामला

महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में बीजेपी और राजद के तीन-तीन, जबकि जेडीयू के दो विधायकों पर कानूनी मुकदमे चल रहे हैं. LJP (RV) के 19 विधायकों में से एक पर महिलाओं के खिलाफ अपराध का मामला दर्ज है.

आरजेडी के 56 फीसदी विधायक पर गंभीर अपराध के मामले

गंभीर अपराधों के आरोपियों की बात करें तो सबसे अधिक प्रतिशत राजद में है, 25 में से 14 विधायक, यानी 56%. बीजेपी के 89 में से 43 (48%), जेडीयू के 85 में से 23 (27%), और लोजपा के 19 में से 10 (53%) विधायक गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं. 

CPI(ML), CPM, IIP और BSP के एक-एक विधायक हैं, और ये सभी गंभीर अपराधों के आरोपी हैं. एमआईएम के पांच में से चार (80%) और कांग्रेस के 6 में से 3 (50%) विधायकों पर भी गंभीर अपराध के केस दर्ज हैं.


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