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Source
Mint
Author
Priya Shandilya
Date

Bihar Election Result: बिहार में चुनावी नतीजे आते ही राजनीति का तापमान और बढ़ गया है। एक तरफ नए चेहरे विधानसभा में पहुंचे हैं, तो दूसरी तरफ एक पुरानी बहस फिर से सिर उठा रही है, नेता अपराधी छवि वाले क्यों चुने जा रहे हैं? इसी बीच एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की नई रिपोर्ट ने फिर से चौंका देने वाले आंकड़े सामने रख दिए हैं।

जीतने वाले आधे से ज्यादा विधायक आरोपी: रिपोर्ट

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की ओर से शनिवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले 243 विधायकों में से 130 यानी 53 प्रतिशत ने अपने हलफनामों में आपराधिक मामलों की घोषणा की है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले चुनाव की तुलना में कुछ कम है, लेकिन फिर भी चिंता का विषय बना हुआ है।

पिछली बार से कम है आंकड़ा लेकिन…

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 में चुने गए 241 विधायकों में से 163 यानी 68 प्रतिशत पर आपराधिक मामले दर्ज थे। इस बार यह आंकड़ा घटकर 53 प्रतिशत पर आया है, लेकिन गंभीर मामलों की संख्या अभी भी बड़ी है।

गंभीर मामलों में भी बड़ी संख्या

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के चुनाव में विजयी 243 उम्मीदवारों में से 102 यानी 42 प्रतिशत पर गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं। 2020 में यह आंकड़ा 241 में से 123 (51%) था। इन मामलों में 6 विजयी विधायकों पर हत्या के मामलों, और 19 विधायक हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। वहीं 9 विजयी उम्मीदवारों ने महिलाओं से जुड़े अपराधों का जिक्र किया है।

कौन-सी पार्टी के कितने विधायक गंभीर मामलों में फंसे?

भाजपा: 89 में से 43 (48%)

जदयू: 85 में से 23 (27%)

राजद: 25 में से 14 (56%)

लोजपा (रामविलास): 19 में से 10 (53%)

कांग्रेस: 6 में से 3 (50%)

एआईएमआईएम: 5 में से 4 (80%)

राष्ट्रीय लोक मोर्चा: 4 में से 1 (25%)

सीपीआई (एमएल): 2 में से 1 (50%)

सीपीएम: 1 में से 1 (100%)

इंडियन इंक्लूसिव पार्टी: 1 में से 1 (100%)

बसपा: 1 में से 1 (100%)

इन आंकड़ों से साफ है कि अपराध और राजनीति का गठजोड़ अब भी खत्म नहीं हुआ है।

रिपोर्ट एक बार फिर वही पुराना सवाल दोहराती है, क्या मतदाता मजबूरी में ऐसे उम्मीदवार चुन रहे हैं या फिर राजनीति में अपराध की पकड़ वाकई इतनी मजबूत हो चुकी है? बिहार की जनता के सामने आने वाले समय में यह सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है।

 


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