बिहार की नई 18वीं विधानसभा (Bihar Assembly Richest MLAs) पहले की तुलना में कहीं अधिक ‘समृद्ध’ नज़र आ रही है। राज्य की राजनीति में धनबल का असर किस गति से बढ़ रहा है, इसका संकेत इस तथ्य से मिलता है कि इस बार 243 में से 218 विधायकों के पास करोड़ों की संपत्ति है। यानी लगभग 90 प्रतिशत विधायक करोड़पति हैं। पिछले कार्यकाल में यह आंकड़ा 81 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। संपत्ति में यह उछाल न केवल राजनीति में बढ़ते आर्थिक प्रभाव को दिखाता है, बल्कि सवाल भी खड़े करता है कि क्या गरीब राज्यों के नेतृत्व में ‘अमीरों की भागीदारी’ लगातार तेज़ हो रही है।
यह चौंकाने वाला खुलासा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और इलेक्शन वॉच की ओर से विधायकों द्वारा दिए गए हलफनामों के विश्लेषण में सामने आया है। रिपोर्ट बताती है कि सभी विधायकों की कुल घोषित संपत्ति लगभग 2193 करोड़ रुपये है, जो पांच साल पहले की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। औसत संपत्ति भी 4.32 करोड़ से बढ़कर 9.20 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
नई विधानसभा में अमीरी-गरीबी का फासला भी उतना ही तीखा दिखाई देता है। सबसे धनी विधायक बने हैं बीजेपी के मुंगेर से कुमार प्रणय, जिनके पास 170 करोड़ रुपये से अधिक की घोषित संपत्ति है। वहीं सबसे कम संपत्ति रखने वाले विधायक भी बीजेपी के ही पीरपैंती से मुरारी पासवान हैं, जिनकी कुल संपत्ति लगभग 6 लाख रुपये से थोड़ी ही ऊपर है। इन दोनों आंकड़ों के बीच का विशाल अंतर बिहार की राजनीति के आर्थिक असमानता के एक बड़े चित्र को सामने लाता है।
दूसरी ओर, जेडीयू के कद्दावर नेता और मोकामा से विधायक अनंत सिंह 100 करोड़ से ज्यादा संपत्ति के साथ सूची में दूसरे स्थान पर हैं। वहीं बीजेपी के अगियांव से विधायक महेश पासवान के पास केवल 8 लाख रुपये की संपत्ति दर्ज है, जो यह संकेत देती है कि आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिनिधियों की संख्या लगातार घट रही है।
पार्टीवार आंकड़े बताते हैं कि लगभग हर दल करोड़पति विधायकों की भारी संख्या के साथ विधानसभा में पहुंचा है। जेडीयू के 85 में से 78, बीजेपी के 89 में से 77 और आरजेडी के 25 में से 24 विधायक करोड़पति हैं। कांग्रेस और AIMIM तो अपने सभी विधायकों के साथ करोड़पतियों की ‘फुल स्ट्रेंथ’ के साथ सदन में मौजूद हैं।
औसत संपत्ति के मामले में राष्ट्रीय लोक मोर्चा सबसे आगे है, जिसके विधायकों की औसत संपत्ति 22.93 करोड़ रुपये है। इसके विपरीत सीपीआई-एमएल के विधायकों की औसत संपत्ति मात्र 1.46 करोड़ रुपये है, जो सबसे कम है। जेडीयू और बीजेपी के विधायकों की औसत संपत्ति क्रमशः 9.53 करोड़ और 8.68 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि बिहार की राजनीति में आर्थिक ताकत का दायरा लगातार विस्तार पा रहा है और चुनावी प्रतिस्पर्धा अब पहले से कहीं अधिक ‘वित्तीय रूप से सक्षम’ चेहरों के बीच होती दिखाई देती है।
