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Source
Hindi.news18
Author
Rakesh Singh
Date
City
NEW DELHI

BRS Top Earner: चुनाव अधिकार संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के मुताबिक के चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) साल 2022-23 के लिए क्षेत्रीय दलों में आमदनी के चार्ट में 737.6 करोड़ रुपये के साथ सबसे ऊपर है.

चुनाव अधिकार संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के मुताबिक के चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) साल 2022-23 के लिए क्षेत्रीय दलों में आमदनी के चार्ट में 737.6 करोड़ रुपये के साथ सबसे ऊपर है. यह सभी दलों को मिली रकम का 42.3 फीसदी है. एडीआर ने कहा कि सबसे अधिक खर्च करने वाली टॉप पांच पार्टियों में तृणमूल कांग्रेस सबसे ऊपर है, जिसने 181.1 करोड़ रुपये या कुल खर्च का 37.6 फीसदी खर्च किया. उसके बाद जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी है, जिसने 79.3 करोड़ रुपये या कुल खर्च का 16.49 फीसदी खर्च किया. बीआरएस ने 57.4 करोड़ रुपये या 11.9 फीसदी खर्च किया.

इसी तरह डीएमके ने 52.6 करोड़ रुपये या 10.9 फीसदी खर्च किए, और समाजवादी पार्टी ने 31.4 करोड़ रुपये या कुल खर्च का 6.5 फीसदी खर्च किया. क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की आर्थिक हालत के बारे में एडीआर के विश्लेषण में 2022-23 के लिए 57 क्षेत्रीय दलों में से 39 की विस्तृत आय और व्यय रिपोर्ट का खुलासा किया गया. बीआरएस के बाद टीएमसी की आय सबसे अधिक 333.45 करोड़ रुपये या 19.1 प्रतिशत थी, जबकि डीएमके ने रिपोर्ट में विश्लेषण किए गए 39 क्षेत्रीय दलों की कुल आय का 214.3 करोड़ रुपये या 12.3 फीसदी आय दर्ज की.

विश्लेषण के अनुसार सामूहिक रूप से शीर्ष पांच दलों ने 1,541.3 करोड़ रुपये या विश्लेषण किए गए दलों की कुल आय का 88.5 फीसदी हिस्सा अर्जित किया, जबकि 39 क्षेत्रीय दलों की कुल घोषित आय 1,740.4 करोड़ रुपये थी. चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के सालाना ऑडिट खातों को पेश करने की समय सीमा 31 अक्टूबर, 2023 निर्धारित की थी. हालांकि, उनमें से केवल 16 ने समय सीमा का पालन किया. 23 दलों ने अपनी रिपोर्ट देरी से पेश की.

एडीआर ने कहा कि शिवसेना, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट, जेएंडके नेशनल कॉन्फ्रेंस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) जैसी प्रमुख पार्टियों सहित 18 क्षेत्रीय दलों की ऑडिट रिपोर्ट प्रकाशित होने के समय चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं थी. कुल 19 क्षेत्रीय दलों ने वित्तीय वर्ष के लिए बिना खर्च की आय घोषित की. बीआरएस की अव्ययित आय सबसे अधिक 680.2 करोड़ रुपये थी, उसके बाद बीजू जनता दल की 171 करोड़ रुपये और डीएमके की 161.7 करोड़ रुपये की अव्ययित आय थी. इसके विपरीत, 20 दलों ने अपनी आय से अधिक व्यय की सूचना दी, जिसमें जनता दल (सेक्युलर) ने अपनी आय से 490.4% अधिक व्यय किया. चंदा और चुनावी बांड पार्टियों के लिए आय के प्राथमिक स्रोत थे, जिनकी रकम 1,522.46 करोड़ रुपये या कुल आय का 87.4 फीसदी थी.


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