ADR Report Election Expense: चुनाव आते ही नेता सबसे पहले एक ही बात दोहराते हैं-चुनाव अब बहुत महंगा हो गया है. पोस्टर से लेकर प्रचार तक खर्च आसमान छू रहा है. लेकिन जब चुनाव खत्म होता है और वही नेता चुनाव आयोग को खर्च का हिसाब देते हैं तो तस्वीर बिल्कुल उलटी नजर आती है. ADR की रिपोर्ट ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर ऐसा ही एक चौंकाने वाला सच सामने रख दिया है.
राजनेता इस बात को कहते नहीं थकते कि चुनाव में खर्चा बढ़ता ही जा रहा है, लेकिन ADR की एक रिपोर्ट ने जो आंकड़ा जारी किया है, वह नेताओं के दावे पर बड़ा सवाल खड़ा कर देता है. खास बात यह कि कि ये आंकड़े किसी एजेंसी ने नहीं, बल्कि उन्हीं नेताओं के द्वारा चुनाव आयोग को दी गई जानकारी पर आधारित हैं. बिहार इलेक्शन वाच के राजीव कुमार ADR रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि चुनाव के पहले नेता इस बात का रोना रोते हैं कि चुनाव महंगा होता जा रहा है और नेता चुनाव में तय सीमा से भी ज्यादा खर्च करते हैं. लेकिन इस बार जो विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद जितने वाले उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग को जानकारी दी, वह हैरान करने वाली है. सवाल यह कि क्या यह संभव है कि तय सीमा से भी काफी कम खर्च हो? राजीव कुमार कहते हैं कि चुनाव आयोग को ऐसी मशीनरी बनानी चाहिए ताकि पूरा सच सामने आ सके.
ADR रिपोर्ट ने नेताओं के दावों पर उठाया सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में औसतन विधायक ने तय सीमा 40 लाख रुपये का सिर्फ 61 प्रतिशत यानी करीब 24.33 लाख रुपये ही खर्च किए. इतना ही नहीं, 42 प्रतिशत विधायकों (100 विधायक) ने तो खर्च सीमा से 61 प्रतिशत से भी कम खर्च दिखाया है. यही वह बिंदु है जहां चुनावी खर्च को लेकर नेताओं के पुराने दावों पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है. जाहिर है ADR ने जो सवाल उठाए हैं, वे वही हैं जो चुनाव के पहले या चुनाव के दौरान उम्मीदवार उठाते रहे हैं कि चुनाव खर्चीला होता जा रहा है तो आखिरकार चुनाव में खर्च की सीमा इतनी कम कैसे हुई. ऐसे में जानकारी सही या गलत सवाल तो उठेंगे ही. अब जरा पार्टी वार आंकड़े देखिए कि कौन सी पार्टी के उम्मीदवार ने औसतन कितना खर्च किया है.
औसतन चुनाव खर्च पार्टी के लिहाज से नजर डालें
- BJP के 89 विधायकों का औसत खर्च ₹27.36 लाख, जो चुनाव खर्च सीमा का 68.4 प्रतिशत है.
- JDU के 84 विधायकों का औसत खर्च ₹25.53 लाख.
- RJD के 24 विधायकों का औसत खर्च ₹19.57 लाख.
- लोकजनशक्ति पार्टी रामविलास के 19 विधायकों का औसत खर्च ₹19.60 लाख.
- INC के 6 विधायकों का औसत खर्च ₹13 लाख.
- हम सेक्युलर के 5 विधायकों का औसत खर्च ₹16.89 लाख.
- AIMIM के 5 विधायकों का औसत खर्च ₹17.37 लाख.
- RLM के 4 विधायकों का औसत खर्च ₹24.84 लाख.
- CPI(ML)(L) के 2 विधायकों का औसत खर्च ₹17.05 लाख.
- CPI(M) के 1 विधायक का औसत खर्च ₹21.39 लाख.
- IIP के 1 विधायक का खर्च ₹23.74 लाख.
- BSP के 1 विधायक का खर्च ₹18.34 लाख है.
बिहार के विधायकों के आंकड़े कर रहे हैरान
औसतन चुनाव खर्च बिहार विधानसभा के 240 विधायकों के चुनाव खर्च घोषणाओं के आधार पर, चुनाव में उनके द्वारा की गई औसत राशि 24.33 लाख है जो खर्च सीमा का 61 प्रतिशत है. जिस पर राजनीतिक दलों की तरफ से दिलचस्प तर्क दिए जा रहे हैं. जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा कहते हैं कि एनडीए उम्मीदवार ने विकास के नाम पर चुनाव लड़ा था और जनता बेहद उत्साहित थी, जिसकी वजह से एनडीए उम्मीदवार को कम खर्च हुआ. वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी कहते हैं कि जनता विकास कार्यों और भरोसेमंद सरकार को देखती है, जिस पर हमारे उम्मीदवार खरे उतरे हैं. इस वजह से ज्यादा खर्च करने की जरूरत ही नहीं पड़ी.
बता दें कि जो चुनावी खर्च की लिमिट 40 लाख से कम है. दो बड़ी पार्टियों के बाद इस आंकड़े पर बिहार के नेताओं और पार्टियों के तर्क भी अलग-अलग हैं. जाहिर है आंकड़े दिलचस्प हैं तो नेताओं के तर्क भी मजेदार हैं, लेकिन अब जरा ये भी देखिए कि उम्मीदवार ने चुनाव में खर्च कहां-कहां किए ताकि यह पता चले कि आखिरकार नेताओं के पैसे कहां खर्च हुए.
आयोग को अलग आंकड़े, जनता को अलग कहानी
- 122 विधायकों ने घोषणा की है कि उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक/प्रिंट मीडिया के माध्यम से प्रचार पर धन खर्च किया है और 118 विधायकों ने घोषणा की है कि उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक/प्रिंट मीडिया के माध्यम से प्रचार पर कोई धन खर्च नहीं किया है.
- 192 विधायकों ने घोषणा की है कि उन्होंने कार्यकर्ताओं द्वारा अभियान पर धन खर्च किया है और 48 विधायकों ने घोषणा की है कि उन्होंने कार्यकर्ताओं द्वारा अभियान पर कोई धन खर्च नहीं किया है.
- 184 विधायकों ने घोषणा की है कि उन्होंने अभियान सामग्री पर धन खर्च किया है और 56 विधायकों ने घोषणा की है कि उन्होंने अभियान सामग्री पर कोई धन खर्च नहीं किया है.
- 237 विधायकों ने घोषणा की है कि उन्होंने वाहनों के प्रयोग पर धन खर्च किया है और 3 (1 प्रतिशत) विधायकों ने घोषणा की है कि उन्होंने वाहनों के प्रयोग पर कोई धन खर्च नहीं किया है.
234 (97.5 प्रतिशत) विधायकों ने घोषणा की है कि उन्होंने वर्चुअल अभियान पर कोई धन खर्च नहीं किया है. - 128 में से 115 (90 प्रतिशत) विधायकों ने घोषणा की है कि उन्होंने आपराधिक मामलों की घोषणा के लिए प्रकाशन पर धन खर्च किया है.
ADR रिपोर्ट से बिहार की सियासत में हलचल
आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर विधायकों ने प्रचार, मीडिया, कार्यकर्ता और यहां तक कि वर्चुअल कैंपेन पर भी बेहद कम या शून्य खर्च दिखाया है. वहीं राजनीतिक दल इसे विकास और भरोसे का नतीजा बता रहे हैं. लेकिन ADR और चुनाव सुधार से जुड़े विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या वाकई चुनाव इतने सस्ते हो गए हैं या फिर खर्च का असली सच कागजों में दर्ज ही नहीं हो पा रहा. अब जरूरत है ऐसी मजबूत चुनावी मशीनरी की, जो दावों और हकीकत के बीच का फर्क साफ तौर पर सामने ला सके.
